सोते-सोते अचानक लगता है गिर रहे हैं नीचे, जानें शरीर में झटका लगने की क्या है वजह
Sleep Disorders: क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि सोते-सोते अचानक हाथ, पैर या पूरा शरीर झटके से हिल गया हो? कई बार ऐसा लगता है जैसे आप किसी ऊंचाई से नीचे गिर रहे हों और उसी एहसास के साथ अचानक आंख खुल जाती है। ऐसा अनुभव चौंका सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में यह सामान्य होता है।
इस स्थिति को हाइपनिक जर्क (Hypnic Jerk) या स्लीप स्टार्ट (Sleep Start) कहा जाता है। यह आमतौर पर उस समय होता है, जब व्यक्ति जागने से नींद की शुरुआती अवस्था में पहुंच रहा होता है। यह एक तरह का अनैच्छिक मांसपेशीय झटका है, जो स्वस्थ लोगों को भी लग सकता है।
क्या है हाइपनिक जर्क और सोते समय क्यों लगता है झटका?
हाइपनिक जर्क में शरीर की एक या अधिक मांसपेशियां अचानक और कुछ पल के लिए सिकुड़ जाती हैं। यह झटका पैर, हाथ, कंधे या पूरे शरीर में महसूस हो सकता है। कभी-कभी इसकी वजह से व्यक्ति चौंककर जाग जाता है।

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जागने से नींद में जाने के दौरान मस्तिष्क और मांसपेशियों की सक्रियता में बदलाव होता है। इसी प्रक्रिया के बीच अचानक मांसपेशियों में हलचल हो सकती है।
हर व्यक्ति में इसका अनुभव अलग हो सकता है। किसी को केवल पैर में झटका लगता है, तो किसी को ऐसा महसूस होता है जैसे वह ऊंचाई से गिर रहा हो। कुछ लोगों को इसके साथ कोई आवाज सुनाई देने जैसी अनुभूति या सपने जैसा अनुभव भी हो सकता है।
नींद अचानक शुरू नहीं होती, बल्कि शरीर धीरे-धीरे इस अवस्था में पहुंचता है। इस बदलाव के दौरान तंत्रिका तंत्र में होने वाली गतिविधियों में परिवर्तन भी हाइपनिक जर्क से जुड़ा हो सकता है। आमतौर पर कभी-कभार होने वाले ऐसे झटके किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होते।
तनाव, थकान और नींद की कमी से बढ़ सकती है समस्या
कुछ लोगों को सोते समय शरीर में झटके बार-बार महसूस होते हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें तनाव, मानसिक दबाव, ज्यादा थकान और पर्याप्त नींद न लेना शामिल हैं।
साइंसडायरेक्ट पर प्रकाशित शोध-समीक्षाओं में भी तनाव, थकान और नींद की कमी को हाइपनिक जर्क बढ़ने के संभावित कारणों में शामिल किया गया है। जब व्यक्ति तनाव में होता है या सोने के समय भी उसके मन में लगातार विचार चलते रहते हैं, तो नींद आने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में झटके महसूस होने की संभावना भी बढ़ सकती है।

कैफीन का सेवन भी कुछ लोगों में नींद की शुरुआत और झटकों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति में इसके कारण और असर एक जैसे नहीं होते।
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?
अगर सोते समय कभी-कभार शरीर में झटका लगता है, तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं होती। बेहतर नींद की आदतें अपनाने से मदद मिल सकती है।
- रोजाना पर्याप्त नींद लें और सोने-जागने का समय तय रखें।
- तनाव कम करने के लिए सोने से पहले कुछ देर आराम करें।
- शाम या रात में कैफीन का सेवन कम करने पर विचार करें।
- शरीर में लगातार थकान होने पर आराम को प्राथमिकता दें।
हालांकि, अगर झटके बार-बार होने लगें, नींद में रुकावट डालें, समय के साथ बढ़ते जाएं या उनके साथ अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लें। खासकर यदि झटके जागते समय भी आते हों या उनके साथ बेहोशी अथवा शरीर पर नियंत्रण खोने जैसी समस्या हो, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
ध्यान रखें: हाइपनिक जर्क अक्सर नींद में जाने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है। लेकिन बार-बार होने वाले झटकों को केवल तनाव या थकान मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

