आखिर क्यों आयुष मंत्री ने परामर्श में नहीं दिखाई तबादलों में पारदर्शिता?
अंतिम दिन हड़बड़ी में सारी प्रक्रिया होने से हुईं भारी त्रुटियां, नियमों की आड़ लेकर 16-16 वर्ष की तैनाती वाले डॉक्टरों को बचाया
Sandesh Wahak Digital Desk: सीएम योगी की तबादला नीति की धज्जियां आयुष महकमें में खूब उड़ाई गयी हैं। अभी तक मनमाने तबादलों को निरस्त भी नहीं किया गया है।

सीएम की मंशा थी कि विभागीय मंत्री के परामर्श से न सिर्फ तबादलों में पारदर्शिता दिखेगी बल्कि नौकरशाही की मनमानी भी नहीं चल सकेगी। लेकिन आयुष विभाग में विभागीय मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु के परामर्श ने मानो तबादलों में गड़बडिय़ों की कलंक कथा ही लिख डाली। 16-16 साल की तैनाती वाले जिन रसूखदार डॉक्टरों का पहले तबादला किया जाना था। उनको बचाने के लिए पूरी प्रक्रिया ही बदल दी गयी।
12 से 13 साल तक की तैनाती वाले ही डॉक्टरों को तबादले के दायरे में रखा गया। अफसरों से अंतिम दिन इतनी हड़बड़ी में तबादले कराये गए कि गड़बडिय़ों का रिकॉर्ड ही टूट गया। नतीजतन बिना शासन और सीएम योगी की अनुमति लिये महानिदेशक को शुद्धिपत्र तक जारी करना पड़ा। एक बार भी समूह ख के तबादलों के वास्ते मंत्री ने विभागीय बैठक तक नहीं बुलाई।

कदम-कदम पर समूह ख में जमकर उड़ाई गई तबादला नीति की धज्जियां
उनकी कार्यप्रणाली से अफसरों का सब्र भी जवाब दे गया था। विभाग में समूह ख के तहत कुल दो हजार डॉक्टरों में से अधिकतम 398 डॉक्टरों का तबादला हो सकता था। नीति के तहत फिलहाल 392 डॉक्टरों का तबादला हुआ है। अफसरों के मुताबिक नीति के हिसाब से एक जिले में तीन वर्ष और मंडल में सात वर्ष पूरे करने वाले डॉक्टरों का तबादला करने पर संख्या करीब 1200 के आसपास आ रही थी।

दस वर्ष से ऊपर तैनाती वाले डॉक्टरों की संख्या करीब 270 थी। कम से कम दस वर्ष की तैनाती को अगर आधार बनाया जाता तो इसके दायरे में करीब 450 डॉक्टर आ रहे थे। वहीं 15 वर्ष या अधिक की तैनाती वाले करीब 40 डॉक्टर बताये जा रहे हैं। आयुष विभाग के महानिदेशक मानवेन्द्र सिंह 15 जून को तबादले की समय सीमा के अंतिम दिन शाम को विभागीय मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु के पास फाइल लेकर पहुंचे थे। एक दिन पहले शासन के साथ समूह क के तबादलों से जुडी बैठक मंत्री ने की थी।
सूत्रों के मुताबिक समूह ख के तबादलों के लिए आयुष के अफसरों को अंतिम दिन मंत्री ने परामर्श के लिए बुलाया था। मंत्री के पास तबादलों की वो सूची भेजी गयी थी। जिसमें नियमों के मुताबिक नीति के दायरे में आ रहे सभी डॉक्टर थे।

डिप्टी डायरेक्टर के नेतृत्व में बनाई गई थी समिति
बस यहीं से परामर्श के नाम पर तबादलों में गड़बडिय़ों का अध्याय शुरू हुआ। अधिकतम 20 फीसदी तबादलों की आड़ में संख्या को आधार बनाकर 12 से 13 साल वाले डॉक्टरों का तबादला करने का फैसला किया गया। तबादले की प्रक्रिया के लिए डिप्टी डायरेक्टर के नेतृत्व में जो समिति बनाई गयी थी। उसकी भी मंत्री के आगे एक न चली। समिति में शामिल एक अफसर के मुताबिक संख्या ज्यादा होने के कारण मंत्री के स्तर पर निर्णय हुआ कि 13 साल की सेवा तक कार्मिकों को लिया जाएगा। 15 जून को शाम चार बजे से देर रात तक तबादलों पर मंत्री के परामर्श के बाद सूची आनन फानन में जारी होने से कई त्रुटियां उसमें रह गयीं।

नतीजतन 15 जून के बाद 19 को आयुष महानिदेशक को शुद्धि पत्र जारी करना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक इसके लिए शासन और सीएम से अनुमति लिया जाना बेहद जरुरी थी। लेकिन शासन में इससे संबंधित कोई फाइल ही नहीं चलाई गई। प्रमुख सचिव रंजन कुमार को इसकी पुष्टि के लिए कई बार फोन किया गया। लेकिन शनिवार को आयोजित होने जा रहे योग दिवस की तैयारियों के मद्देनजर उनकी काफी व्यस्तता थी। संपर्क नहीं हो सका। दफ्तर में भी नहीं मिले।
अनुरोध संबंधी आये थे करीब डेढ़ हजार पत्र
सूत्रों के मुताबिक समूह ख में डॉक्टरों ने तबादले के लिए अनुरोध संबंधी करीब डेढ़ हजार पत्र विभाग के अफसरों को भेजे थे। जिसमें से सिर्फ डेढ़ सौ के आसपास ही अफसरों ने फाइनल किये। हालांकि मंत्री इससे कहीं ज्यादा चाहते थे। संख्या ज्यादा होने के चलते ऐसा नहीं किया जा सका।
… और जब मंत्री की कार्यप्रणाली पर भडक़ उठे विभाग के शीर्ष अफसर
सूत्रों की माने तो 15 जून को मंत्री की ऐसी कार्यप्रणाली देखकर शीर्ष अफसर तक भडक़ उठे थे। उन्होंने गुस्से से कहा कि फंसेंगे तो हम लोग। रातों रात इतने सारे तबादले कैसे करेंगे। यहां कोई तमाशा चल रहा है क्या। मैं चला जाऊंगा। कोई विभागीय नीति तक क्लीयर नहीं थी। तीन चार दिन पहले कोई प्रक्रिया नहीं हुई। अंतिम दिन ही सारी प्रक्रिया हुई।
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