साक्षी महाराज की नाराजगी पर अखिलेश यादव ने दिया ऑफर, बोले- आखिरी पड़ाव पीडीए…
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब उन्नाव से भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने सार्वजनिक मंच से लोधी समाज की उपेक्षा को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि कल्याण सिंह और उमा भारती के जाने के बाद से लोधी समाज को भारतीय जनता पार्टी में सत्ता और संगठन में सम्मानजनक हिस्सेदारी नहीं मिल रही है।
यह बयान उस वक्त आया जब साक्षी महाराज हाल ही में एटा पहुंचे थे, जहां उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की प्रतिमा का अनावरण किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भावुक होते हुए कहा, अगर कल्याण सिंह न होते तो कोई राम मंदिर बना ही नहीं सकता था। उन्होंने बाबरी ढांचा गिरने के दौरान कार सेवकों पर गोली न चलाने का साहसिक फैसला लिया।”
भाजपा को लेकर गहराई नाराजगी
अपने संबोधन में साक्षी महाराज ने स्पष्ट तौर पर यह इशारा किया कि लोधी समाज, जो वर्षों से भाजपा का मजबूत सामाजिक आधार रहा है, आज अपने आप को उपेक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने अब तक लोधी समाज को संगठन में वह स्थान नहीं दिया जिसके वे हकदार हैं। उनके इस बयान के बाद सियासी हलकों में हलचल मच गई है और यह सवाल उठने लगा है कि क्या भाजपा से लोधी समाज का मोहभंग हो सकता है?
अखिलेश यादव का तंज
साक्षी महाराज की नाराजगी पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सीधे तौर पर नाम लिए बिना एक्स (पूर्व ट्विटर) पर टिप्पणी करते हुए लिखा “भाजपा में जो लोग अपने समाज को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किये जाने के बाद उपेक्षित किये जाने के ‘साक्षी’ हैं, वो जब सच्चे मन से बोलते हैं तो सच ही बोलते हैं। वो जानते हैं कि ‘पीडीए’ ही उनका स्वाभाविक और स्थायी पड़ाव है…”
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार अखिलेश यादव की यह टिप्पणी न केवल भाजपा के अंदरूनी असंतोष को उभारने की कोशिश है, बल्कि ओबीसी वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति का हिस्सा भी है।
उत्तर प्रदेश में लोधी समाज लगभग 5.10% आबादी के साथ 70 विधानसभा सीटों और 12 लोकसभा क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रभाव रखता है। वर्षों से भाजपा के पक्ष में लामबंद रहे इस वर्ग की नाराजगी अगर खुलकर सामने आई, तो यह भाजपा के लिए 2027 के चुनावी समीकरणों में बड़ा झटका साबित हो सकती है।
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