बिहार: अशोकधाम मंदिर में बिजली का तार गिरने से भगदड़, 7 श्रद्धालुओं की मौत, 12 से अधिक घायल

Ashok Dham Temple Stampede: बिहार के लखीसराय स्थित प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में सावन के तीसरे सोमवार को बड़ा हादसा हो गया। भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच बिजली का तार गिरने से अचानक अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई।

हादसे में सात श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 12 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को लखीसराय सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और मेडिकल टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव अभियान शुरू किया गया।

सुबह करीब 6:40 बजे बिगड़े हालात

लखीसराय के डीएम शैलेंद्र कुमार के मुताबिक, सावन के तीसरे सोमवार को मंदिर (Ashok Dham Temple) में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक इंतजाम किए गए थे। प्रशासन की टीम तड़के करीब 3:30 बजे से ही मौके पर मौजूद थी।

डीएम के अनुसार, दो ट्रेनों के रुकने के कारण अचानक बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच गए। सुबह करीब 6:40 से 6:45 बजे के बीच खेत की तरफ लगी बैरिकेडिंग टूट गई और लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे। इसके बाद भगदड़ (Stampede) मच गई।

प्रशासन के मुताबिक, हादसे के बाद करीब 10-15 लोगों को तत्काल एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उनका इलाज शुरू किया।

प्रत्यक्षदर्शी ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

Ashok Dham Temple Stampede

मोकामा से अशोक धाम मंदिर पहुंचे प्रत्यक्षदर्शी विनोद कुमार ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि हादसे में उनकी पत्नी भीड़ में दब गईं, जबकि उनकी एक बेटी अब भी लापता है।

विनोद कुमार के मुताबिक, प्रवेश द्वार पर बांस की बैरिकेडिंग लगी थी और करीब 100 लोग बाहर से जबरन अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे। धक्का-मुक्की के दौरान बैरिकेडिंग टूट गई और लोग नीचे गिरने लगे। उनका आरोप है कि उस समय मौके पर पर्याप्त प्रशासनिक व्यवस्था नहीं थी।

देशभर में प्रसिद्ध है Ashok Dham Temple

लखीसराय का इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर, जिसे अशोकधाम के नाम से भी जाना जाता है, सावन और महाशिवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

मंदिर की स्थापना से जुड़ी मान्यता के अनुसार, 7 अप्रैल 1977 को स्थानीय युवकों को जमीन के अंदर विशाल काले पत्थर का शिवलिंग मिला था। बाद में इसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया। 11 फरवरी 1993 को जगन्नाथपुरी के शंकराचार्य ने मंदिर परिसर के पुनर्निर्माण का उद्घाटन किया था।

सावन के सोमवार को यहां भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में आज हुए हादसे (Ashok Dham Temple Stampede) ने मंदिर की भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से हादसे की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

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