गुरु गोरक्षनाथ घाट की गुंबदनुमा छत गिरने से अधिवक्ता की मौत, स्वास्थ्यकर्मियों व सीएमओ पर केस
Gorakhpur News: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में राप्ती नदी तट स्थित राजघाट परिसर के गुरु गोरक्षनाथ घाट पर रविवार को एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो गया। अंतिम संस्कार में शामिल होने आए दो अधिवक्ता घाट पर बने गुंबदनुमा बैठने के स्थान की छत (स्लैब) गिरने से मलबे की चपेट में आ गए। हादसे में घायल एक वकील की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई, जबकि दूसरे की हालत नाजुक बनी हुई है। घटना की मुख्य वजह आकाशीय बिजली गिरना बताई जा रही है। वहीं, एंबुलेंस के देर से पहुंचने और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए मृतक की पत्नी की शिकायत पर स्वास्थ्यकर्मियों समेत सीएमओ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे दोनों अधिवक्ता
जानकारी के मुताबिक, राप्तीनगर निवासी अधिवक्ता आलोक अस्थाना और शक्तिनगर कॉलोनी निवासी अधिवक्ता संजय सिंह अपने साथी वकील विनोद तिवारी की माताजी के अंतिम संस्कार में शामिल होने गुरु गोरक्षनाथ घाट पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक गुंबदनुमा चबूतरे पर आकाशीय बिजली गिरी और उसका स्लैब भरभराकर ढह गया। मलबे में दबकर दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। आलोक अस्थाना को जिला अस्पताल से बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। संजय सिंह का इलाज मेडिकल कॉलेज में जारी है।
अधिवक्ताओं के हंगामे के बाद स्वास्थ्यकर्मियों व सीएमओ पर मुकदमा
अधिवक्ता आलोक अस्थाना की मौत की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में उग्र वकील जिला अस्पताल पहुंच गए, जिससे वहां तनाव की स्थिति पैदा हो गई। एंबुलेंस के समय पर न पहुंचने और इलाज में देरी का आरोप लगाते हुए मृतक की पत्नी ने पुलिस को तहरीर दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर लापरवाह स्वास्थ्यकर्मियों और सीएमओ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। स्थिति को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए अस्पताल परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
सीएम योगी ने जताया दुख, डीएम ने दिए जांच के आदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का गहरा संज्ञान लेते हुए पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और 4 लाख रुपये की आर्थिक मदद की घोषणा की। उन्होंने जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री राहत कोष से भी अतिरिक्त सहायता देने का आश्वासन दिया है। वहीं, जिलाधिकारी दीपक मीणा ने पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने के आदेश दिए हैं। डीएम ने कहा कि आकाशीय बिजली से गिरे ढांचे के साथ-साथ घाट पर बने अन्य चबूतरों की मजबूती की जांच होगी। साथ ही एंबुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम की भी पड़ताल की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
27.85 करोड़ से हुआ था घाट का सुंदरीकरण
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में करीब 27 करोड़ 85 लाख 71 हजार रुपये की लागत से गुरु गोरक्षनाथ घाट के सुंदरीकरण का प्रस्ताव तैयार कर निर्माण कराया गया था। इसमें अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों के बैठने के लिए कई गुंबदनुमा चबूतरों का निर्माण किया गया था। इस हादसे के बाद अब इतनी बड़ी लागत से बने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

