लखनऊ अग्निकांड के बाद मुआवजे पर HC सख्त, UP सरकार को समान नीति बनाने का निर्देश
UP Compensation Policy: जून 2026 में लखनऊ (Lucknow) के तीन मंजिला भवन में हुए भीषण अग्निकांड (Fire Accident) में 15 युवाओं की मौत के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने मुआवजे की व्यवस्था पर बड़ा निर्देश दिया है। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजिव शुक्ला की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से ऐसी घटनाओं के लिए स्पष्ट और समान मुआवजा नीति बनाने को कहा है, जहां कानून में पहले से मुआवजे का प्रावधान नहीं है।
सरकार ने कोर्ट को बताया कि मौजूदा नीति मुख्य रूप से प्राकृतिक आपदाओं के लिए है। कोर्ट ने कहा कि नई नीति में मृतक, घायल, गंभीर रूप से घायल और दिव्यांग पीड़ितों के लिए मुआवजा तय करने के स्पष्ट मानक होने चाहिए, ताकि अलग-अलग घटनाओं में मनमानी या भेदभाव की गुंजाइश न रहे। सुनवाई में 25 लाख और 50 लाख रुपये तक के अलग-अलग मुआवजों का भी जिक्र हुआ।
पीड़ित परिवारों को अब तक करीब 11 लाख
राज्य सरकार के अनुसार, अग्निकांड पीड़ित परिवारों को अलग-अलग स्रोतों से करीब 11 लाख रुपये मिले हैं।
- 5 लाख रुपये मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से
- 4 लाख रुपये SDRF से
- 2 लाख रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष से
कुछ परिवारों ने बताया कि PM Relief Fund की 2 लाख रुपये की सहायता अभी नहीं मिली है। इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील से जानकारी मांगी है।
दिव्यांग पीड़ित का इलाज सरकार कराएगी
25 वर्षीय जयंत गुप्ता अग्निकांड में गंभीर रूप से घायल होकर दिव्यांग हो गए। KGMU में उनके इलाज पर करीब 70 हजार रुपये महीने खर्च हो रहा है, जबकि उन्हें अब तक सिर्फ 50 हजार रुपये की सहायता मिली है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को उनके इलाज का पूरा बिल उठाने और KGMU को उनसे कोई इलाज शुल्क न लेने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने हादसे के लिए केवल भवन मालिक को जिम्मेदार मानने पर भी सवाल उठाया। LDA और दूसरे विभागों की भूमिका की जांच के तहत यह देखा जा रहा है कि नियमों के विपरीत निर्माण या व्यावसायिक इस्तेमाल की अनुमति कैसे मिली। सरकार को पहले दिए गए मुआवजे का पूरा ब्योरा देने और सहायता राशि बढ़ाने के सवाल पर जवाब देने को कहा गया है।
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