‘चुनाव आयोग किसी के इशारे पर चलेगा तो क्या बचेगा?’ TMC मामले में HC ने लगा दी फटकार
TMC Symbol Row: पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद बढ़ गया है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के पहले से इस्तेमाल किए जा रहे ‘लिफाफा’ चिन्ह को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को दिए जाने के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने चुनाव आयोग (Election Commission) पर कड़ी टिप्पणी की है।
सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्णा राव की पीठ ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर चुनाव आयोग किसी निजी पक्ष के कहने पर काम कर रहा है तो फिर क्या बचता है। अदालत ने आयोग को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम करने की जरूरत पर जोर दिया। मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
183 चिन्ह उपलब्ध थे तो ‘लिफाफा’ ही क्यों?
अदालत ने सवाल उठाया कि जब चुनाव आयोग के पास करीब 183 मुक्त चुनाव चिन्ह उपलब्ध थे, तो पहले ISF को आवंटित किए जा चुके ‘लिफाफा’ चिन्ह को ही दूसरी पार्टी को देने की जरूरत क्यों पड़ी। ISF ने इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
हाईकोर्ट ने यह भी पूछा कि जब एक ही चुनाव चिन्ह के लिए दो आवेदन आए हों तो आयोग का कर्तव्य क्या बनता है और किस नियम के तहत चिन्ह दूसरी पार्टी को आवंटित किया गया। अदालत ने आयोग से यह भी जानना चाहा कि ISF के आवेदन को खारिज करने की लिखित वजह क्यों नहीं बताई गई।
ISF को मिला ‘अलमारी’ चिन्ह
विवाद (TMC Symbol Row) के बीच चुनाव आयोग ने ISF को ‘अलमारी’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया है, जबकि डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को ‘लिफाफा’ दिया गया है। आयोग का पक्ष है कि ‘लिफाफा’ एक मुक्त चिन्ह है और उसके आवंटन का अधिकार आयोग के पास है।
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