RBI ने बढ़ाया रेपो रेट तो HDFC Bank ने लिया बड़ा फैसला, जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर?

HDFC Bank News : होम लोन की EMI हर महीने लोगों के बजट का बड़ा हिस्सा होती है। ऐसे में ब्याज दरों में थोड़ा-सा बदलाव भी लाखों कर्जदारों पर असर डाल सकता है। इसी बीच HDFC बैंक ने अपनी MCLR दरों में बदलाव किया है, जिससे कुछ ग्राहकों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसका फायदा सभी होम लोन ग्राहकों को तुरंत नहीं मिलेगा। वहीं, RBI ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है। ऐसे में कर्जदारों के लिए यह समझना जरूरी है कि दोनों फैसलों का उनकी EMI पर क्या असर पड़ सकता है।

HDFC बैंक के MCLR में बदलाव से किसे मिलेगा फायदा?

MCLR यानी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट वह दर है, जिसके आधार पर इससे जुड़े कई लोन की ब्याज दर तय होती है। बैंक की MCLR में कमी होने पर इससे जुड़े कुछ ग्राहकों की ब्याज दर घट सकती है और उन्हें EMI में राहत मिल सकती है।

हालांकि, इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ग्राहक का लोन किस अवधि वाली MCLR से जुड़ा है और उसकी ब्याज दर अगली बार कब रीसेट होनी है। इसलिए दरों में बदलाव के बाद भी EMI तुरंत कम हो, यह जरूरी नहीं है।

RBI ने बढ़ाया रेपो रेट, फ्लोटिंग रेट वाले ग्राहकों पर असर

भारतीय रिजर्व बैंक ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की। इसके बाद यह दर 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गई है। रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर खासकर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जिनके फ्लोटिंग रेट वाले लोन बाहरी बेंचमार्क से जुड़े हैं। ऐसे लोन की ब्याज दर में बदलाव अपेक्षाकृत जल्दी दिखाई दे सकता है।

दूसरी ओर, MCLR से जुड़े पुराने फ्लोटिंग रेट लोन पर बैंक की नई दरों का असर लागू होने के बाद दिखाई दे सकता है। नए होम लोन का बड़ा हिस्सा बाहरी बेंचमार्क से जुड़ा होता है, इसलिए केवल MCLR में बदलाव के आधार पर सभी ग्राहकों की EMI घटने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

अपनी EMI में बदलाव जानने के लिए क्या करें?

अगर आपका होम लोन MCLR से जुड़ा है, तो नई दर लागू होने पर ब्याज में बदलाव हो सकता है। लेकिन EMI कितनी घटेगी या बढ़ेगी, यह बकाया लोन, बची हुई अवधि, मौजूदा ब्याज दर और रीसेट की तारीख पर निर्भर करेगा।

कर्जदारों को अपने लोन एग्रीमेंट में यह देखना चाहिए कि उनका लोन MCLR या बाहरी बेंचमार्क में से किससे जुड़ा है। साथ ही, बैंक से अगली रीसेट डेट और लागू होने वाली ब्याज दर की जानकारी लेना भी जरूरी है। सिर्फ MCLR में बदलाव देखकर EMI में बड़ी गिरावट मान लेना सही नहीं होगा।

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