कॉकरोच जनता पार्टी ने चुनाव आयोग और दिल्ली पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

Sandesh Wahak Digital Desk: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने राष्ट्रीय राजधानी के प्रेस क्लब में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। इस दौरान पार्टी के सह-संयोजक और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 72 घंटों के दौरान देश में ऐसी अप्रत्याशित घटनाएं घटी हैं, जिनकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी। सीजेपी ने सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि संस्था देश को आगे बढ़ाने के बजाय निष्पक्षता से समझौता कर चुकी है और मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त भाजपा को जिताने के लिए कार्य कर रहे हैं।

पुलिस पर अमानवीय व्यवहार का आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान व्यक्तिगत त्रासदियों और पुलिसिया कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया गया। आशुतोष रांका ने बताया कि हाल ही में कार्यकर्ता अभिजीत की दादी का निधन हो गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब अभिजीत को इस दुखद समाचार की जानकारी दी गई, तब भी दिल्ली पुलिस का रवैया बेहद अमानवीय और संवेदनहीन था। पुलिसकर्मी अपने साथ कैमरे और माइक लेकर वहां खड़े हो गए और इस संवेदनशील पल को भी एक तमाशे की तरह पेश करने की कोशिश की गई।

दिल के मरीजों की गुहार को भी नकारा

मामले को आगे बढ़ाते हुए बताया गया कि दिपके बार-बार पुलिस से यह विनती कर रहे थे कि उनके माता-पिता हृदय रोगी (हार्ट पेशेंट) हैं और इस तरह की अचानक खबर से वे तुरंत अचेत हो जाते हैं। उन्होंने गांव में मौजूद अपने चचेरे भाई से बात करने की अनुमति मांगी ताकि पूरी स्थिति समझी जा सके, लेकिन दिल्ली पुलिस का दिल नहीं पसीजा। वक्ताओं ने कहा कि आज देश में हालात ऐसे बन चुके हैं कि किसी अपने के इस दुनिया से चले जाने पर भी प्रशासनिक अमला पूरी तरह संवेदनहीन हो चुका है।

चार पूर्व मुख्यमंत्रियों के सड़कों पर उतरने की सराहना

देशभर में लोकतंत्र को बचाने के लिए उठ रही आवाज़ों का जिक्र करते हुए सीजेपी ने चार पूर्व मुख्यमंत्रियों अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, माणिक सरकार और पिनाराई विजयन के सड़क पर उतरने की सराहना की। पार्टी ने देश के छात्रों और युवाओं के साथ मिलकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे इन सभी नेताओं का दिल से आभार व्यक्त किया।

फोन जब्ती और सबूत प्लांट करने की आशंका

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सौरव दास ने अपनी हिरासत के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें आरकेपुरम थाने में रखा गया था, जबकि आशुतोष रांका और अभिजीत दिपके को अलग-अलग स्थानों पर कैद रखा गया था। उन्होंने आशंका जताई कि पुलिस ने उनके फोनों को कब्जे में लेकर उसमें सुबूत प्लांट किए होंगे और उनकी निजी डिजिटल गतिविधियों की जांच की है। सौरव दास ने इन हालातों को सीधे तौर पर ‘खुली इमरजेंसी’ करार देते हुए कहा कि ऐसे तानाशाही हालात आखिरी बार 1975 में देखे गए थे।

दिल्ली में छावनी जैसे हालात

सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर उठाए गए कदमों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सौरव दास ने दावा किया कि पिछले कुछ दिनों में पूरी दिल्ली को एक छावनी में बदल दिया गया है। देश के विभिन्न हिस्सों नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, बंगाल, कश्मीर और सीमावर्ती इलाकों से बीएसएफ के जवानों को एयरलिफ्ट करके दिल्ली लाया गया है और लगभग 40 हजार जवानों को तैनात किया गया है। शहर में भारी पाबंदियां लगाई गई हैं।

मेट्रो और ट्रेनें बंद करने पर साधा निशाना

प्रदर्शनकारियों को रोकने के नाम पर आम नागरिकों को हो रही परेशानियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि शहर में 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करना, दूसरे राज्यों से आने वाली ट्रेनों और राजधानी एक्सप्रेस को रद्द करना तथा दुकानों को जबरन बंद करवाना आम जनता के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। रविवार के दिन दुकानों और बाजारों को बंद रखने का कोई औचित्य नहीं है, जिससे आंदोलनों की केवल नकारात्मक छवि ही गढ़ने की कोशिश की जा रही है। अंत में सीजेपी ने दावा किया कि इस दमनकारी सरकार का अंत अब नजदीक आ चुका है और वह मुख्य चुनाव आयुक्त को बचाने का प्रयास कर रही है।

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