गर्दन का दर्द कंधे और हाथ तक क्यों फैलता है? इन 5 लक्षणों को न करें नजरअंदाज
Neck Pain and Shoulder Pain: गर्दन और कंधे में दर्द होना आम समस्या है, लेकिन हर बार इसकी वजह कंधे के जोड़ में परेशानी होना नहीं है। कई मामलों में दर्द की शुरुआत गर्दन की रीढ़ से होती है और धीरे-धीरे कंधे, कंधे की हड्डी के आसपास और हाथ तक पहुंच जाती है। इसकी एक प्रमुख वजह गर्दन की नसों पर दबाव पड़ना हो सकती है। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को सर्वाइकल रेडिक्यूलोपैथी (Cervical Radiculopathy) कहा जाता है।
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) में उपलब्ध चिकित्सा जानकारी के अनुसार, गर्दन की रीढ़ में डिस्क से जुड़ी परेशानी, उम्र के साथ हड्डियों में होने वाले बदलाव या हड्डी के अतिरिक्त बढ़ने से नसों पर दबाव पड़ सकता है। इससे दर्द के साथ झुनझुनी, सुन्नपन और हाथ में कमजोरी जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। हालांकि, हर तरह के कंधे के दर्द का कारण गर्दन की समस्या नहीं होती। रोटेटर कफ, टेंडन, कंधे के जोड़ या बर्साइटिस जैसी समस्याएं भी दर्द पैदा कर सकती हैं।
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क्या गर्दन की समस्या से कंधे में दर्द हो सकता है?
गर्दन की रीढ़ को सर्वाइकल स्पाइन कहा जाता है। इसमें कई छोटी हड्डियां होती हैं, जिन्हें वर्टिब्रा (Vertebrae) कहते हैं। इनके बीच डिस्क मौजूद होती हैं। गर्दन से निकलने वाली नसें कंधे और हाथ के अलग-अलग हिस्सों तक संवेदना और मांसपेशियों की गतिविधियों से जुड़े संकेत पहुंचाती हैं।

जब गर्दन की किसी नस की जड़ पर दबाव पड़ता है या उसमें जलन होती है, तो दर्द गर्दन तक सीमित रहने के बजाय कंधे और हाथ तक फैल सकता है। कई बार व्यक्ति को लगता है कि उसके कंधे के जोड़ में परेशानी है, जबकि दर्द की शुरुआत गर्दन से हुई होती है।
इसके उलट, कंधे की अपनी किसी समस्या के कारण भी गर्दन के आसपास दर्द महसूस हो सकता है। इसलिए केवल यह देखकर कि दर्द कहां हो रहा है, उसकी सही वजह का पता लगाना हमेशा संभव नहीं होता।
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पिंच्ड नर्व क्या है और दर्द हाथ तक कैसे पहुंचता है?
गर्दन की रीढ़ से निकलने वाली नसों की जड़ें हड्डियों के बीच बने छोटे रास्तों से होकर बाहर आती हैं। इन रास्तों को न्यूरल फोरामिना (Neural Foramina) कहा जाता है।

यदि गर्दन की डिस्क अपनी सामान्य जगह से बाहर की ओर निकलकर नस पर दबाव डालने लगे या हड्डियों में बदलाव के कारण नस के निकलने की जगह कम हो जाए, तो नस दब सकती है। इसे आम भाषा में पिंच्ड नर्व (Pinched Nerve) कहा जाता है।
इस दबाव के कारण नस के रास्ते में दर्द या दूसरे तंत्रिका संबंधी लक्षण महसूस हो सकते हैं। इसे सर्वाइकल रेडिक्यूलोपैथी कहा जाता है। इसमें दर्द गर्दन से कंधे की हड्डी के आसपास फैल सकता है और कई बार हाथ या उंगलियों तक पहुंच सकता है।
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गर्दन और कंधे के दर्द में दिख सकते हैं ये 5 लक्षण
सर्वाइकल रेडिक्यूलोपैथी में दर्द के अलावा कुछ अन्य संकेत भी दिखाई दे सकते हैं। इन पर ध्यान देना जरूरी है।
- गर्दन से कंधे तक फैलता दर्द: दर्द गर्दन से शुरू होकर कंधे या कंधे की हड्डी के आसपास महसूस हो सकता है। कुछ मामलों में यह हाथ तक भी पहुंचता है।
- हाथ या उंगलियों में झुनझुनी: प्रभावित नस के कारण हाथ या उंगलियों में सुई चुभने जैसी अनुभूति हो सकती है।
![हाथ या उंगलियों में झुनझुनी]()
- सुन्नपन महसूस होना: हाथ या उंगलियों के किसी हिस्से में संवेदना कम हो सकती है।
- हाथ में कमजोरी: नस पर दबाव पड़ने से मांसपेशियों की ताकत प्रभावित हो सकती है। इससे कुछ काम करने में परेशानी हो सकती है।
- गर्दन हिलाने पर दर्द बढ़ना: गर्दन की कुछ गतिविधियों से दर्द या अन्य लक्षण बढ़ सकते हैं। हालांकि, यह संकेत अकेले सर्वाइकल रेडिक्यूलोपैथी की पुष्टि नहीं करता।
कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
यदि गर्दन और कंधे का दर्द लगातार बना रहे, हाथ में झुनझुनी या सुन्नपन हो अथवा कमजोरी महसूस हो, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। हाथ या पैर में अचानक कमजोरी, चलने में परेशानी या तेजी से बढ़ते तंत्रिका संबंधी लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
ध्यान रखें कि गर्दन और कंधे का दर्द एक-दूसरे से जुड़ा हो सकता है, लेकिन हर मामले में इसकी वजह एक जैसी नहीं होती। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर लक्षणों, शारीरिक जांच और जरूरत पड़ने पर अन्य जांचों की मदद लेते हैं।
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