प्रयागराज में जलभराव रोकने के लिए हाईकोर्ट सख्त, 50 साल की जरूरतों के हिसाब से बनेगा ड्रेनेज प्लान
Prayagraj News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हर साल बारिश के दौरान होने वाले जलभराव और बाढ़ जैसे हालात पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले में निर्देश दिया कि शहर का नया ड्रेनेज प्रोजेक्ट अगले 50 सालों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाए, ताकि बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात न बनें।
इस परियोजना को तकनीकी रूप से बेहतर बनाने के लिए MNNIT Prayagraj के पर्यावरण और सिविल इंजीनियरिंग विभाग के चार प्रोफेसर नगर निगम को मुफ्त तकनीकी सलाह देंगे।
तीन हफ्ते में बजट मंजूरी देने का निर्देश
सुनवाई के दौरान नगर आयुक्त ने अदालत को बताया कि छह अक्टूबर को शासन से परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन वित्त विभाग की अंतिम स्वीकृति बाकी है। योजना में मौजूदा नालों को बेहतर बनाने, समानांतर नए नाले बनाने और मोरी गेट के पंपिंग स्टेशन को आधुनिक बनाने का प्रस्ताव शामिल है।
Allahabad High Court ने वित्त विभाग को तीन सप्ताह के भीतर बजट मंजूर करने और अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। तय समय में मंजूरी नहीं मिलने पर प्रमुख सचिव वित्त को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ेगा।
नालों से अतिक्रमण हटेगा, जमीन पर भी फैसला
अदालत ने जवाहर लाल नेहरू रोड और महात्मा गांधी मार्ग समेत शहर में नालों पर बने स्थायी पेवमेंट, गेट और दीवारों को हटाने का आदेश दिया। सुनवाई में बताया गया कि नालों पर आरसीसी स्लैब और पक्के निर्माण होने से सफाई तथा पानी का बहाव प्रभावित हो रहा है।
इसके अलावा, गंगा प्रदूषण बोर्ड को हर छह महीने में और बरसात शुरू होने से पहले सीवर लाइनों की गहराई से सफाई करने की जिम्मेदारी दी गई है।
जलभराव (Prayagraj Waterlogging) रोकने के लिए जॉर्ज टाउन क्लब और केपी ट्रस्ट की जमीन पर वाटर कैचमेंट टैंक और पंपिंग स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को केपी ट्रस्ट की जमीन चिह्नित करने और सोसाइटी के लीज पर देने से इनकार करने की स्थिति में 90 साल की लीज के लिए अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है।
सभी संबंधित विभागों को 16 नवंबर 2026 तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करना होगा। अदालत ने मामले में प्रमुख सचिव वित्त और यूपी जल निगम ग्रामीण को भी पक्षकार बनाया है।
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