लंबे समय तक एंटी-डिप्रेसेंट लेने से शरीर पर क्या असर पड़ता है? जानें साइड इफेक्ट

Antidepressants Side Effects: डिप्रेशन एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या है, जो बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों को प्रभावित कर सकती है। वैश्विक स्तर पर महिलाओं में डिप्रेशन पुरुषों की तुलना में अधिक पाया जाता है। इसके पीछे हार्मोन में बदलाव, जैविक कारण, सामाजिक परिस्थितियां और मन से जुड़े कई कारक हो सकते हैं।

डिप्रेशन और एंग्जायटी के इलाज में डॉक्टर कई बार एंटी-डिप्रेसेंट यानी अवसादरोधी दवाएं देते हैं। ये दवाएं दिमाग में कुछ रासायनिक संदेशवाहकों की गतिविधि को प्रभावित करके मूड और दूसरे लक्षणों में सुधार करने में मदद करती हैं। हालांकि, इनका असर दिखने में समय लग सकता है। दवा का चुनाव और उसकी खुराक डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही होनी चाहिए।

एंटी-डिप्रेसेंट दवाएं क्या हैं और कैसे करती हैं काम?

एंटी-डिप्रेसेंट दवाओं का मुख्य इस्तेमाल डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने के लिए किया जाता है। कुछ दवाएं एंग्जायटी डिसऑर्डर, ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD), पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) और लंबे समय से चल रहे कुछ प्रकार के दर्द के इलाज में भी इस्तेमाल होती हैं।

डॉक्टर मरीज की उम्र, लक्षण, दूसरी बीमारियों, पहले किए गए इलाज और दवा के संभावित दुष्प्रभावों को ध्यान में रखकर दवा चुनते हैं।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, ये दवाएं दिमाग में मौजूद न्यूरोट्रांसमीटर की गतिविधि को प्रभावित करती हैं। न्यूरोट्रांसमीटर ऐसे रासायनिक पदार्थ हैं, जो तंत्रिका कोशिकाओं के बीच संदेश पहुंचाने में मदद करते हैं। सेरोटोनिन, नोरएड्रिनेलाइन और कुछ दवाओं के मामले में डोपामिन मूड, नींद, ध्यान, ऊर्जा और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से जुड़े होते हैं। हालांकि, डिप्रेशन की वजह केवल किसी एक रसायन की कमी नहीं होती।

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार, दिमाग की तंत्रिका कोशिकाएं रासायनिक संकेतों के जरिए एक-दूसरे से संपर्क करती हैं। जब एक कोशिका सेरोटोनिन या नोरएड्रिनेलाइन जैसे रसायन छोड़ती है, तो ये अगली कोशिका पर असर डाल सकते हैं। इसके बाद कुछ रसायन वापस पहली कोशिका में चले जाते हैं। इस प्रक्रिया को रीअपटेक (Reuptake) कहते हैं।

कई एंटी-डिप्रेसेंट दवाएं इस प्रक्रिया को कम करती हैं। इससे तंत्रिका कोशिकाओं के बीच रासायनिक संदेशों के आदान-प्रदान में बदलाव आता है।

एंटी-डिप्रेसेंट दवाओं के प्रमुख प्रकार

  • एसएसआरआई (SSRIs): ये दवाएं सेरोटोनिन के रीअपटेक को रोकती हैं। मेयो क्लीनिक के अनुसार, इन्हें डिप्रेशन के इलाज में अक्सर शुरुआती विकल्पों में रखा जाता है। कई पुरानी दवाओं की तुलना में इनका सुरक्षा रिकॉर्ड बेहतर माना जाता है।
  • एसएनआरआई (SNRIs): ये सेरोटोनिन और नोरएड्रिनेलाइन के रीअपटेक को प्रभावित करती हैं। नोरएड्रिनेलाइन मूड, ध्यान और सतर्कता से जुड़ा है। कुछ एसएनआरआई दवाओं का इस्तेमाल एंग्जायटी और नसों से जुड़े दर्द में भी किया जाता है।
  • अन्य एंटी-डिप्रेसेंट: कुछ दवाएं अलग तरीके से काम करती हैं। उदाहरण के लिए, बुप्रोपियन दिमाग में नोरएड्रिनेलाइन और डोपामिन से जुड़े संकेतों को प्रभावित करता है।

हर दवा का असर और उसके दुष्प्रभाव अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति की दवा खुद से लेना या अपनी दवा बदलना सही नहीं है।

लंबे समय तक दवा लेने पर हो सकते हैं ये साइड इफेक्ट

NCBI के अनुसार, कुछ मरीजों को डिप्रेशन दोबारा होने का खतरा कम करने के लिए लंबे समय तक एंटी-डिप्रेसेंट लेने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, लंबे समय तक दवा लेने का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को नुकसान होगा। इलाज कितने समय तक चलेगा, यह बीमारी की स्थिति, पहले हुए डिप्रेशन के दौर और डॉक्टर के आकलन पर निर्भर करता है।

लंबे समय तक इलाज के दौरान कुछ लोगों में ये समस्याएं हो सकती हैं:

  • यौन स्वास्थ्य पर असर: कुछ लोगों में यौन इच्छा या यौन क्रिया से जुड़ी समस्याएं लंबे समय तक बनी रह सकती हैं।
  • वजन में बदलाव: कुछ दवाओं से वजन बढ़ सकता है, जबकि कुछ के साथ भूख कम हो सकती है।
  • नींद और भावनाओं में बदलाव: कुछ लोगों को सुस्ती, नींद से जुड़ी परेशानी या भावनात्मक रूप से सुन्न महसूस होने की समस्या हो सकती है।
  • दूसरी दवाओं के साथ प्रतिक्रिया: कुछ एंटी-डिप्रेसेंट दूसरी दवाओं के साथ लेने पर रक्तस्राव, ब्लड प्रेशर या अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती हैं। इसलिए डॉक्टर को अपनी सभी दवाओं और सप्लीमेंट्स के बारे में बताना जरूरी है।

दवा लेते समय किन बातों का रखें ध्यान?

डिप्रेशन से निपटने के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार जीवनशैली में जरूरी बदलाव करना भी मददगार हो सकता है। यदि लंबे समय से एंटी-डिप्रेसेंट लेते हुए वजन, नींद, यौन स्वास्थ्य या भावनाओं में कोई असामान्य बदलाव महसूस हो, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी दें।

डॉक्टर आपकी मौजूदा स्थिति के अनुसार दवा या इलाज में बदलाव की सलाह दे सकते हैं। अपनी मर्जी से दवा बंद न करें और न ही उसकी खुराक बदलें। अचानक दवा बंद करने से कुछ लोगों में परेशानी हो सकती है। दवा कम करने या बंद करने का फैसला डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए।

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