बलिया में जाति प्रमाण पत्र के लिए 50 हजार की रिश्वत का आरोप, लेखपाल सस्पेंड

Ballia News: उत्तर प्रदेश के बलिया में जाति प्रमाण पत्र जारी करने के नाम पर रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। सुल्तानपुर गांव के रहने वाले सुरेंद्र प्रसाद तुरैहा ने क्षेत्रीय लेखपाल संदीप सिंह और अन्य राजस्व कर्मियों पर प्रति आवेदन 50 हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया है।

शिकायतकर्ता ने इस संबंध में मोबाइल पर हुई बातचीत की दो ऑडियो रिकॉर्डिंग भी साक्ष्य के तौर पर उपलब्ध कराई। शिकायत सामने आने के बाद बलिया जिलाधिकारी ने मामले का संज्ञान लिया। डीएम के निर्देश पर तहसील सदर के राजस्व ग्राम सुल्तानपुर के क्षेत्रीय लेखपाल संदीप सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।

ऑनलाइन आवेदन के बाद सामने आया मामला

तहसीलदार सदर ने सोमवार को मामले में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने तुरैहा जाति का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। जरूरी साक्ष्य और अभिलेख उपलब्ध नहीं होने के कारण आवेदन को नियमानुसार पोर्टल पर आख्या के साथ निस्तारित/निरस्त कर दिया गया था।

शिकायतकर्ता की ओर से दी गई दोनों ऑडियो रिकॉर्डिंग का भी प्राथमिक परीक्षण किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि रिकॉर्डिंग में बातचीत करने वाले व्यक्ति की पहचान प्राथमिक स्तर पर स्पष्ट नहीं हो सकी है। हालांकि, शिकायतकर्ता ने दावा किया कि रिकॉर्डिंग में सुनाई दे रही आवाज क्षेत्रीय लेखपाल संदीप सिंह की है।

रिकॉर्डिंग में अधिकारियों को रकम देने की बात का दावा

तहसीलदार की रिपोर्ट के अनुसार, रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए प्रति आवेदन 50 हजार रुपये मांगने और रकम का एक हिस्सा अधिकारियों को दिए जाने से जुड़ी बातचीत का उल्लेख है।

साक्ष्य के तौर पर दी गई रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर यह भी कहा गया है कि पैसे देने के बाद ऑनलाइन आवेदन कराया जाए और अगले दिन उसे बांसडीह कचहरी पहुंचाया जाए।

मामले को राजस्व कर्मियों से जुड़े गंभीर भ्रष्टाचार और अवैध धन उगाही के आरोपों से जुड़ा मानते हुए तहसीलदार ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए लेखपाल को निलंबित करने तथा विभागीय जांच की संस्तुति की थी।

भूलेख कार्यालय से किया गया संबद्ध

बलिया जिलाधिकारी के आदेश के बाद संदीप सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। निलंबन अवधि में उन्हें तहसील बलिया के भूलेख कार्यालय से संबद्ध किया गया है। मामले में अब विभागीय जांच के जरिए लगाए गए आरोपों की पड़ताल की जाएगी।

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