बलरामपुर में बड़ा सियासी संकट: अध्यक्ष-EO की ‘तानाशाही’ से तंग आकर 11 निर्वाचित सदस्यों का सामूहिक इस्तीफा
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले की आदर्श नगर पंचायत पचपेड़वा में स्थानीय राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। नगर पंचायत अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी (ईओ) की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाते हुए, कुल 16 निर्वाचित सदस्यों में से 11 सदस्यों ने सामूहिक रूप से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
सभी बागी सदस्यों ने अपना त्याग पत्र जिलाधिकारी को संबोधित करते हुए अपर जिलाधिकारी (एडीएम) ज्योति राय को सौंपा है। इन सदस्यों ने आरोप लगाया है कि अध्यक्ष और ईओ की कार्यप्रणाली ‘पूर्णतः तानाशाही और अलोकतांत्रिक’ है, जो नगर पालिका अधिनियम 1962 के विपरीत है और निर्वाचित प्रतिनिधियों की गरिमा को ठेस पहुँचा रही है।

भ्रष्टाचार और राजनीतिक भेदभाव के गंभीर आरोप
सामूहिक इस्तीफा देने वाले सदस्यों ने नगर पंचायत प्रशासन पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उनके त्याग पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि राजनीतिक भेदभाव के आधार पर वार्डों में सफाई और निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य मनमाने तरीके से कराए जा रहे हैं। नगर पंचायत द्वारा कराए गए कार्य मानक विहीन हैं।
सदस्यों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि सभी कार्यों की उच्चस्तरीय स्थलीय जाँच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। सदस्यों ने साफ कहा कि इस अलोकतांत्रिक वातावरण में उनका पद पर बने रहना संभव नहीं है।
प्रशासन ने दिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश
इस गंभीर घटना पर संज्ञान लेते हुए एडीएम (वित्त एवं राजस्व) ज्योति राय ने कहा कि 11 निर्वाचित सदस्यों का सामूहिक त्याग पत्र प्राप्त हुआ है। एडीएम ने कहा, “यह एक गंभीर मामला है। आरोपों की प्रकृति को देखते हुए, जिलाधिकारी महोदय के निर्देशानुसार इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच तत्काल शुरू की जाएगी। जांच टीम मौके पर जाकर सभी तथ्यों और रिकॉर्ड की गहराई से पड़ताल करेगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
वहीं, नगर पंचायत अध्यक्ष रवि वर्मा ने खुद पर लगे आरोपों पर फिलहाल कोई सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि वह शहर से बाहर हैं और जल्द लौटकर अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने दावा किया कि वह समान रूप से विकास कार्यों के लिए प्रतिबद्ध हैं और सभासदों से आम जनमानस की भावनाओं का सम्मान करने का अनुरोध किया है।नगर पंचायत पचपेड़वा में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच यह टकराव अब एक बड़े राजनीतिक संकट में बदल गया है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
रिपोर्ट : योगेंद्र त्रिपाठी
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