बृजभूषण शरण सिंह के बरी होने पर महिला पहलवानों ने राऊज एवेन्यू कोर्ट में दी चुनौती
Sandesh Wahak Digital Desk: भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न मामले में निचली अदालत से मिली बरी का फैसला अब राऊज एवेन्यू कोर्ट में चुनौती दी गई है। चार महिला पहलवानों ने इस आदेश को अदालत में चुनौती देते हुए कहा है कि निचली अदालत का फैसला रूढ़िवादी और दकियानूसी सोच पर आधारित है। मामले में बृजभूषण शरण सिंह के सह-आरोपी विनोद तोमर की बरी के आदेश को भी चुनौती दी गई है। संभावना जताई जा रही है कि महिला पहलवानों की इस अपील पर राऊज एवेन्यू कोर्ट कल सुनवाई कर सकता है।
दायर याचिका में तर्क दिया गया है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश कानूनी दृष्टि से टिकाऊ नहीं है। साथ ही आरोप लगाया गया कि सबूतों का गलत और चुनिंदा तरीके से आकलन किया गया है। अपील में कहा गया कि यह आदेश अनुमान और अटकलों पर आधारित है तथा स्थापित कानूनी सिद्धांतों को सही ढंग से लागू नहीं किया गया।
महिला पहलवानों का कहना है कि आदेश में पीड़िता के व्यवहार को लेकर पुरानी रूढ़िवादी सोच को आधार बनाया गया है। उनका तर्क है कि अदालत ने यह मान लिया कि यौन उत्पीड़न की शिकार महिला को एक निश्चित तरीके से ही व्यवहार करना चाहिए। पहलवानों ने कहा कि डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष के रसूख को देखते हुए करियर बर्बाद होने के डर से तुरंत खुलकर विरोध न कर पाना स्वाभाविक था, लेकिन अदालत ने इस पहलू को नजरअंदाज कर दिया।
याचिका में आगे कहा गया है कि ट्रायल कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद महत्वपूर्ण साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का केवल एकतरफा और चयनात्मक मूल्यांकन किया। इसी आधार पर इस फैसले को फिलहाल चुनौती दी गई है। उल्लेखनीय है कि बृजभूषण शरण सिंह पर लगभग तीन साल तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 3 अगस्त 2026 को उन्हें बरी किया गया था। उनके साथ विनोद तोमर को भी सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया गया था। अब इसी फैसले को अदालत में चुनौती दी गई है।
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