लखनऊ में कोडीन कफ सिरप का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, जेल में बंद लोगों से मिलने पहुंचा था
Bhupinder Singh Chauhan: उत्तर प्रदेश STF ने फेंसिडिल और कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े मामले में वांछित भूपिंदर सिंह चौहान को गिरफ्तार किया है। STF के मुताबिक, वह लखनऊ जेल में बंद अपने साथियों से मिलने आया था। इसी दौरान बुधवार शाम उसे शहीद पथ तिराहे के पास से पकड़ लिया गया।
इंस्पेक्टर अंजनी कुमार पांडेय के नेतृत्व में टीम ने यह कार्रवाई की। तलाशी में भूपिंदर के पास से दो मोबाइल फोन, एक एटीएम कार्ड और 2,300 रुपये नकद मिले। उसके खिलाफ लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में पहले से मुकदमा दर्ज है। STF ने अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
फार्मा कंपनी में काम करने के बाद शुरू किया वितरण का कारोबार
STF की पूछताछ के मुताबिक, भूपिंदर सिंह चौहान ने जनवरी 2006 से जून 2013 तक निकोलस पिरामल कंपनी में काम किया था। बाद में इस कंपनी का नाम एबॉट हेल्थकेयर हो गया। इस दौरान वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में एरिया मैनेजर था।
वर्ष 2014 में उसने अपने भांजे विशाल सिंह के नाम पर ‘VET AGENCIES’ का ड्रग लाइसेंस बनवाया और एबॉट कंपनी का स्टॉकिस्ट बनवाया। इसके बाद 2016-17 में दूसरे भांजे विभोर राणा के नाम से ‘GR TRADING’ फर्म शुरू की। दिसंबर 2018 में इस फर्म को सुपर डिस्ट्रीब्यूटरशिप मिल गई।
वर्ष 2019 में कंपनी से इस्तीफा देने के बाद भूपिंदर ‘GR TRADING’ में मैनेजर बन गया। कोरोना काल में कफ सिरप का कारोबार बढ़ा। इसके बाद विशाल सिंह के नाम पर चल रही ‘BN Pharmaceuticals’ को सीएफए (CFA) बनाया गया। इस फर्म में भूपिंदर और संजय शर्मा को कम्पीटेंट पर्सन की जिम्मेदारी दी गई थी।
इस नेटवर्क के जरिए अलीगढ़, सहारनपुर, गाजियाबाद, मेरठ और मुरादाबाद समेत कई जिलों के स्टॉकिस्टों को कफ सिरप की बिक्री की जाती थी।
फर्जी फर्मों से खरीद-बिक्री, हवाला के जरिए भुगतान का आरोप
STF के मुताबिक, कफ सिरप के कारोबार में माल की खरीद-बिक्री दिखाने के लिए गाजियाबाद में कई फर्जी फर्में बनाई गई थीं। इनमें ‘वाशु एंटरप्राइजेज’, ‘अमर ट्रेडर्स’, ‘अंकित फार्मा’ और ‘कृष्णा फार्मा’ शामिल हैं। जांच में आरोप है कि इन फर्मों के जरिए कागजों पर कारोबार दिखाया जाता था।
पुलिस के अनुसार, अमित गुप्ता निवासी गोरखपुर और आसिफ निवासी मेरठ इन फर्मों से बिना बिल और जरूरी दस्तावेजों के माल खरीदते थे। इसके बाद कफ सिरप को नशे के रूप में इस्तेमाल के लिए त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल की सीमा पर सक्रिय तस्करों तक पहुंचाया जाता था। इस कारोबार का भुगतान हवाला के जरिए होने का आरोप है।
STF के अनुसार, लगातार कार्रवाई के बाद कंपनी ने दिसंबर 2024 से फेंसिडिल कफ सिरप का निर्माण बंद कर दिया था। इस मामले में विभोर, विशाल, सचिन और बिट्टू समेत अन्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। अब भूपिंदर सिंह चौहान की गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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