UP के 52 जिलों की पंचायतों पर गिरी गाज, CSC की 44.84 लाख कमाई का हिसाब गायब
UP Panchayat Revenue: उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) से होने वाली कमाई को लेकर पंचायती राज विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश के 52 जिलों में CSC से अर्जित राजस्व और ग्राम पंचायतों के स्वयं के राजस्व स्रोत (OSR) खातों में जमा रकम के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
पंचायती राज निदेशक अमित कुमार सिंह ने हरदोई, लखनऊ समेत सभी संबंधित जिलों की समीक्षा रिपोर्ट जारी करते हुए जिला पंचायत राज अधिकारियों (DPRO) को वित्तीय वर्ष 2026-27 और पूर्व वर्षों का बकाया राजस्व जमा कराने के निर्देश दिए हैं। कुल 44 लाख 84 हजार 468 रुपये अभी OSR खातों में जमा नहीं हुए हैं।
1.47 करोड़ की कमाई, खाते में पहुंचे सिर्फ 1.02 करोड़
विभागीय समीक्षा में सामने आया कि 52 जिलों में CSC केंद्रों के जरिए कुल 1 करोड़ 47 लाख 10 हजार 2 रुपये का राजस्व अर्जित हुआ। इसके मुकाबले ग्राम पंचायतों के OSR (Own Source Revenue) खातों में सिर्फ 1 करोड़ 2 लाख 25 हजार 534 रुपये जमा किए गए।
इस तरह अर्जित राजस्व और जमा रकम में 44,84,468 रुपये का अंतर मिला है। निदेशक ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक जिले की सर्वाधिक बकाया वाली 10 ग्राम पंचायतों की सूची बनाकर तत्काल वसूली की जाए। एक सप्ताह में रकम जमा नहीं होने पर संबंधित ग्राम पंचायतों और जिम्मेदार कर्मचारियों-अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पंचायतों की अपनी कमाई का पैसा आखिर जाता कहां है?
OSR पंचायतों की अपनी आय का हिस्सा है। इसमें हाउस टैक्स, बाजार शुल्क, जल निकासी शुल्क और पंचायत सचिवालय या जनसेवा केंद्र से जारी आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र जैसी सेवाओं से मिलने वाला शुल्क शामिल है।
CSC के जरिए मिलने वाले निर्धारित सेवा शुल्क को प्रधान और पंचायत सचिव के समन्वय से पंचायत के OSR खाते में जमा किया जाना अनिवार्य है। इसी रकम का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर स्वच्छता, बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों में किया जाता है।
राजस्व समय पर जमा न करना वित्तीय अनियमितता माना जा सकता है। लापरवाही मिलने पर संबंधित सचिव या जिम्मेदार व्यक्ति से स्पष्टीकरण, रिकवरी और निलंबन जैसी कार्रवाई हो सकती है। OSR लक्ष्य पूरे नहीं होने पर पंचायतों को मिलने वाले प्रोत्साहन और कुछ सरकारी अनुदानों पर भी असर पड़ सकता है।
इन जिलों में सबसे ज्यादा अंतर
रिपोर्ट के मुताबिक कई जिलों में अर्जित और जमा राजस्व के बीच बड़ा अंतर मिला है।
- एटा: 61.87% – 83,010 में से 31,648 रुपये जमा
- बहराइच: 56.93% – 2,08,410 में से 89,763 रुपये जमा
- लखनऊ: 53.63% – 1,59,480 में से 73,950 रुपये जमा
- हाथरस: 53.46% – 94,290 में से 43,878 रुपये जमा
- हरदोई: 53.15% – 6,42,150 में से 3,00,853 रुपये जमा
- ललितपुर: 50.34% – 1,74,540 में से 86,677 रुपये जमा
- गोंडा: 49.31% – 2,11,230 में से 1,07,075 रुपये जमा
- सुल्तानपुर: 48.38% – 2,78,520 में से 1,43,775 रुपये जमा
- बांदा: 41.68% – 98,130 में से 57,234 रुपये जमा
- बरेली: 39.46% – 3,20,052 में से 1,93,775 रुपये जमा
- सीतापुर: 31.45% – 13,79,730 में से 9,45,773 रुपये जमा
- अयोध्या: 23.56% – 3,59,760 में से 2,75,000 रुपये जमा
हरदोई के डीएम अनुनय झा ने कहा कि पंचायतों को प्राप्त राजस्व को निर्धारित व्यवस्था के तहत जमा कराने के नियम का पूरी तरह पालन कराया जाएगा और लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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