शिक्षकों की कमी से बेहाल छात्राओं का सड़क पर उतरा आक्रोश, सीएम आवास कूच करते समय बालागंज में पुलिस ने रोका
Lucknow News: राजधानी लखनऊ में जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय की छात्राओं के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। पारा स्थित आवासीय विद्यालय में पढ़ाई ठप होने, शिक्षकों की भारी कमी और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली से नाराज होकर कक्षा 6 से 12वीं तक की सैकड़ों छात्राएं बाउंड्रीवाल लांघकर बाहर निकल आईं। आक्रोशित छात्राओं ने करीब पांच किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए दुबग्गा के हरदोई-कानपुर बाइपास पर पहुंचकर तीनों तरफ से सड़क जाम कर दी और धरने पर बैठ गईं।
डीएम के न पहुंचने पर सीएम आवास की ओर किया पैदल कूच
दुबग्गा बाइपास पर करीब दो घंटे तक विरोध-प्रदर्शन चलने के बावजूद जब जिलाधिकारी (डीएम) मौके पर छात्राओं की शिकायतें सुनने नहीं पहुंचे, तो छात्राएं उग्र होकर मुख्यमंत्री आवास की ओर पैदल ही निकल पड़ीं। छात्राओं के अचानक आगे बढ़ने से पुलिस-प्रशासन में हड़कंप मच गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ठाकुरगंज, काकोरी, दुबग्गा और पारा थानों की पुलिस के साथ भारी संख्या में महिला पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया। पुलिस अधिकारियों ने छात्राओं को रोकने की कोशिश की, लेकिन वे आगे बढ़ती रहीं।
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बालागंज चौराहे पर जय प्रकाश नारायण स्कूल के छात्रों द्वारा धरना प्रदर्शन किए जाने के कारण यातायात प्रभावित है।
वाहन चालकों से अनुरोध है कि अति आवश्यक न हो तो कृपया वैकल्पिक मार्ग का प्रयोग करें ।@Uppolice @lkopolice pic.twitter.com/aaOuzlanM2— LUCKNOW TRAFFIC POLICE (@lucknowtraffic) August 17, 2026
बालागंज चौराहे पर रोक जाने के बाद बीच सड़क पर बैठीं छात्राएं
पुलिस बल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठाकुरगंज के बालागंज चौराहे पर बैरीकेडिंग लगाकर छात्राओं के काफिले को रोक लिया। पुलिस द्वारा रोके जाने से नाराज छात्राएं चौराहे पर ही बीच सड़क पर धरने पर बैठ गईं, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। मौके पर मौजूद एसीपी शकील अहमद समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी छात्राओं से बातचीत कर उन्हें समझाने-बुझाने में जुटे रहे, लेकिन छात्राएं अपनी मांगों पर अड़ी रहीं।
प्रदर्शनकारी छात्राओं का स्पष्ट आरोप है कि विद्यालय में लंबे समय से शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, जिसकी वजह से पाठ्यक्रम पूरा नहीं हो पा रहा है और उनकी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। छात्राओं ने आरोप लगाया कि सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि हॉस्टल में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता भी बेहद खराब है। इसके अलावा, यदि कोई छात्रा बीमार पड़ती है तो उसे उचित इलाज तक मुहैया नहीं कराया जाता। बार-बार अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं आया।
विभागीय निदेशक के उपेक्षापूर्ण रवैये से भड़का छात्राओं का गुस्सा
छात्राओं के इस तीव्र आक्रोश के पीछे अधिकारियों की अनदेखी को भी बड़ा कारण माना जा रहा है। रविवार को ही समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने सर्वोदय विद्यालय का औपचारिक निरीक्षण किया था। हालांकि, निरीक्षण के दौरान उन्होंने छात्राओं की समस्याएं और शिकायतें सुनना मुनासिब नहीं समझा, जिससे छात्राओं का गुस्सा और बढ़ गया। अधिकारियों की इसी उपेक्षा के बाद छात्राओं ने सड़क पर उतरने का फैसला किया।
लखनऊ में सर्वोदय विद्यालय के छात्रों द्वारा सड़क पर उतरकर मोर्चा खोलने की एक हफ्ते के भीतर यह दूसरी घटना है। इससे पहले शुक्रवार को भी पारा मोहान रोड स्थित विद्यालय के छात्रों ने शिक्षकों की कमी को लेकर प्रदर्शन किया था और करीब दो घंटे तक रास्ता जाम रखा था। उस दौरान वहां से गुजर रहे समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण भी जाम में फंस गए थे। मंत्री ने स्वयं गाड़ी से उतरकर छात्रों की समस्याएं सुनी थीं और छह पूर्णकालिक शिक्षकों के सापेक्ष सिर्फ चार कार्यरत होने व गेस्ट टीचरों की अनियमितता को जल्द दूर करने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद अव्यवस्थाओं का आलम जस का तस बना हुआ है।

