Siddharthnagar News: टीईटी की अनिवार्यता से शिक्षक नाराज, बोले- 20 लाख शिक्षकों की नौकरी खतरे में

Sandesh Wahak Digital Desk: पूर्व में नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ देशभर के शिक्षकों में गुस्सा है। इसी कड़ी में सोमवार को सिद्धार्थनगर में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बैनर तले शिक्षकों ने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर भव्य धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की गई है।

क्या है शिक्षकों की चिंता?

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष आदित्य कुमार शुक्ला ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय के इस फैसले से 2010 से पहले नियुक्त हुए लगभग 20 लाख से अधिक शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ गई है। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन शिक्षकों के साथ अन्याय है, जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी शिक्षण कार्य को समर्पित कर दी है।

शिक्षकों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

पहला: न्यायालय का यह फैसला केवल भविष्य में नियुक्त होने वाले शिक्षकों पर ही लागू किया जाए, 2010 से पहले वालों पर नहीं।

दूसरा: नियमों के तहत नियुक्त किए गए अनुभवी शिक्षकों की नौकरी और गरिमा को सुरक्षित किया जाए।

तीसरा: लाखों शिक्षकों को नौकरी से निकाले जाने के संकट से बचाने के लिए सरकार जल्द से जल्द कोई नीतिगत कदम उठाए।

महासंघ के नेताओं ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना ज़रूरी है, लेकिन उन शिक्षकों के अधिकारों का सम्मान करना भी उतना ही ज़रूरी है, जिन्होंने अपनी योग्यता साबित करके नौकरी पाई है। उन्होंने इस फैसले को शिक्षकों को सड़क पर लाने की “कूट रचित चाल” बताया, जिसके लिए उन्होंने सीधे तौर पर अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया।

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