गैस, कब्ज और पेट फूलने से हैं परेशान? पाचन को सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं ये 4 योगासन
Health Tips: पेट फूलना, गैस, कब्ज और पेट में भारीपन जैसी समस्याएं रोजमर्रा की जिंदगी को परेशान कर सकती हैं। कई बार इसकी वजह खान-पान के साथ-साथ कम शारीरिक गतिविधि और लगातार तनाव भी होता है। ऐसे में दिनचर्या में योग को शामिल करना पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है।
योग में शरीर की हलचल, सांस लेने के अभ्यास और मन को शांत करने वाली गतिविधियां शामिल होती हैं। इससे तनाव कम करने और शारीरिक सक्रियता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह दावा करना सही नहीं होगा कि कोई एक योगासन दो दिन में पाचन ठीक कर देता है। इसका असर व्यक्ति की स्थिति और नियमित अभ्यास पर निर्भर करता है।
योग और पाचन का क्या है संबंध?
पाचन तंत्र का संबंध सिर्फ पेट और आंतों से नहीं है। दिमाग और आंतों के बीच लगातार संपर्क बना रहता है, जिसे ‘गट-ब्रेन एक्सिस’ कहा जाता है। तनाव, चिंता और भावनात्मक बदलाव इस संपर्क को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ लोगों में इससे पेट दर्द, गैस, पेट फूलने या मल त्याग की आदत में बदलाव जैसे लक्षण बढ़ सकते हैं।
NCBI पर उपलब्ध शोध के मुताबिक, कुछ पाचन संबंधी समस्याओं में योग लक्षणों को कम करने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि, अलग-अलग अध्ययनों में योग के प्रकार, अभ्यास की अवधि और प्रतिभागियों की स्थिति अलग रही है। इसलिए योग को पाचन संबंधी बीमारियों के इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि स्वास्थ्य को सहारा देने वाली दिनचर्या के रूप में देखना चाहिए।
पाचन स्वास्थ्य के लिए 4 योगासन और उन्हें करने का तरीका
1. वज्रासन
वज्रासन बैठकर किया जाने वाला आसान योगासन है। इसमें घुटनों को मोड़कर एड़ियों पर बैठा जाता है और पीठ सीधी रखी जाती है। इसे भोजन के बाद बैठने के लिए पारंपरिक रूप से अपनाया जाता रहा है। इससे शरीर को शांत रखने और आराम से बैठने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह साबित नहीं है कि वज्रासन अकेले पाचन को तुरंत तेज कर देता है।
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करने का तरीका:
- घुटनों को मोड़कर पैरों को पीछे की ओर रखें।
- धीरे-धीरे एड़ियों पर बैठें और पीठ सीधी रखें।
- सामान्य गति से सांस लें और शुरुआत में कुछ मिनट ही अभ्यास करें।
घुटनों या टखनों में दर्द होने पर इस आसन को करने से बचें या विशेषज्ञ की सलाह लें।
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मार्जरासन-बिटिलासन (कैट-काउ पोज)
इस योगासन में रीढ़ को बारी-बारी से ऊपर और नीचे की ओर घुमाया जाता है। इससे रीढ़ की लचक और शरीर की हलचल बेहतर करने में मदद मिल सकती है। पेट और धड़ की हल्की मूवमेंट कुछ लोगों को भारीपन या पेट में खिंचाव महसूस होने पर आरामदायक लग सकती है। हालांकि, गैस दूर करने में इसके सीधे असर के ठोस प्रमाण सीमित हैं।

करने का तरीका:
- हाथों और घुटनों के सहारे जमीन पर आ जाएं।
- सांस लेते हुए छाती को आगे खोलें और पेट को हल्का नीचे करें।
- सांस छोड़ते हुए पीठ को ऊपर की ओर गोल करें।
- इस प्रक्रिया को धीरे-धीरे दोहराएं।
कमर या गर्दन में दर्द हो तो शरीर पर जोर न डालें।
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पवनमुक्तासन
पवनमुक्तासन को आमतौर पर गैस और पेट के भारीपन से राहत देने वाले आसनों में गिना जाता है। इसमें पीठ के बल लेटकर घुटने को पेट की ओर लाया जाता है। इस दौरान पेट और कूल्हे के आसपास हल्का दबाव बनता है। कुछ लोगों को इससे आराम महसूस हो सकता है, लेकिन इसे पाचन संबंधी बीमारी का पक्का इलाज नहीं मानना चाहिए।

करने का तरीका:
- पीठ के बल लेट जाएं और एक घुटने को मोड़कर छाती की ओर लाएं।
- दोनों हाथों से घुटने को आराम से पकड़ें।
- कुछ सामान्य सांसों तक इसी स्थिति में रहें।
- पैर नीचे करें और दूसरे पैर से भी यही प्रक्रिया दोहराएं।
पेट में तेज दर्द, हाल की सर्जरी या ऐसी कोई स्थिति जिसमें पेट पर दबाव डालना नुकसानदेह हो सकता है, तो पहले डॉक्टर से सलाह लें।
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भुजंगासन
भुजंगासन को कोबरा पोज भी कहा जाता है। इसमें पेट के बल लेटकर छाती और शरीर के ऊपरी हिस्से को धीरे-धीरे ऊपर उठाया जाता है। यह पीठ और शरीर के ऊपरी हिस्से की गतिशीलता बढ़ाने में मदद कर सकता है। यह पाचन को सीधे तेज करने वाला आसन नहीं है, लेकिन नियमित शारीरिक गतिविधि संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती है।

करने का तरीका:
- पेट के बल लेटकर हथेलियों को कंधों के पास रखें।
- सांस लेते हुए छाती को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं।
- कंधों को ढीला रखें और कमर पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें।
- दर्द या असहजता होने पर तुरंत सामान्य स्थिति में लौट आएं।
योग करते समय इन बातों का रखें ध्यान
पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए योग के साथ संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी, नियमित शारीरिक गतिविधि और अच्छी नींद पर भी ध्यान देना जरूरी है। शुरुआत धीमी गति से करें और अपनी क्षमता के अनुसार अभ्यास बढ़ाएं। नियमित अभ्यास से कुछ लोगों को फायदा महसूस हो सकता है, लेकिन हर व्यक्ति पर इसका असर एक जैसा नहीं होता।
यदि आपको पहले से कोई बीमारी है, तो योग शुरू करने से पहले डॉक्टर या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की सलाह लें। लगातार कब्ज, तेज पेट दर्द, बार-बार उल्टी, मल में खून या बिना वजह वजन कम होने जैसी समस्या हो तो केवल योग पर निर्भर न रहें और चिकित्सकीय जांच कराएं।
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