पूर्वांचल का सियासी चक्रव्यूह: दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा में फंसी 5 जिलाध्यक्षों की कुर्सी, वाराणसी से गोरखपुर तक ‘अपनों’ में रार
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश भाजपा ने राज्य को 98 सांगठनिक जिलों में विभाजित किया है, जिनमें से 93 पर नियुक्तियां हो चुकी हैं। लेकिन पूर्वांचल के 5 महत्वपूर्ण जिलों चंदौली, देवरिया, वाराणसी, अंबेडकरनगर और गोरखपुर में जिलाध्यक्षों के नाम तय करना पार्टी के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। यहां जातिगत समीकरण और दिग्गजों का वर्चस्व आपस में टकरा रहा है।
चंदौली: राजनाथ सिंह बनाम डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय
यह जिला रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय का गृह जनपद है। डॉ. पांडेय वर्तमान अध्यक्ष काशी सिंह को हटाकर किसी ब्राह्मण चेहरे को लाना चाहते हैं। उनका तर्क है कि 2024 में क्षत्रिय अध्यक्ष होने के बावजूद ठाकुर वोट बैंक सपा की ओर खिसक गया, जिससे वे खुद चुनाव हार गए। काशी सिंह को राजनाथ सिंह खेमे का समर्थन प्राप्त है, जिससे निर्णय अटका हुआ है।
देवरिया: पूर्व प्रदेश अध्यक्षों का टकराव
यहां दो पूर्व प्रदेश अध्यक्षों रमापति राम त्रिपाठी और सूर्य प्रताप शाही के बीच वर्चस्व की लड़ाई है। रमापति त्रिपाठी अपने करीबी पिंटू जायसवाल को अध्यक्ष बनाना चाहते थे, लेकिन सूर्य प्रताप शाही और स्थानीय सांसदों-विधायकों ने यह कहकर विरोध किया कि पिंटू 2021 में ही पार्टी में आए थे, उन्हें सीधा जिलाध्यक्ष बनाना पुराने कार्यकर्ताओं में गलत संदेश देगा।
अंबेडकरनगर: कुर्मी-ब्राह्मण कार्ड का पेंच
रणनीति: प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी यहाँ किसी कुर्मी या ब्राह्मण चेहरे की तलाश में हैं। फैजाबाद मंडल में सपा के कुर्मी-ब्राह्मण गठजोड़ को काटने के लिए भाजपा को यहां मजबूत जातीय समीकरण की जरूरत है। राणा रणधीर सिंह का नाम चर्चा में था, लेकिन जातीय संतुलन के चलते घोषणा रुक गई।
वाराणसी: पीएम मोदी की ‘हरी झंडी’ का इंतजार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में हंसराज विश्वकर्मा फिलहाल कमान संभाल रहे हैं। हंसराज पिछड़ों का बड़ा चेहरा हैं और MLC भी हैं। सूत्रों के अनुसार, वाराणसी में जिलाध्यक्ष का फैसला दिल्ली (PMO) से मिली मंजूरी के बाद ही होगा।
गोरखपुर: सीएम योगी के इशारे का इंतजार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ में स्थिति साफ है, लेकिन प्रक्रिया अभी अधूरी है। मार्च 2025 में देवेश श्रीवास्तव को अध्यक्ष बनाया गया था, जिनका जून 2025 में निधन हो गया। तब से यह पद खाली है और यहां मुख्यमंत्री की पसंद का ही नाम फाइनल होना तय है।
Also Read: UP Electricity Department: संविदा कर्मियों की छंटनी पर नियामक आयोग सख्त, 7 दिन में तलब की रिपोर्ट

