अखिलेश यादव ने की मूर्ति देवी-मालती देवी महिला सम्मान की शुरुआत, बोले- आधी आबादी के बिना विकास अधूरा
Lucknow News: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में अभी काफी समय है, लेकिन सियासी दलों ने अपनी-अपनी जमीन मजबूत करनी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने आज, 22 मार्च को, एक नई पहल करते हुए मूर्ति देवी-मालती देवी महिला सम्मान समारोह की शुरुआत की।
राजधानी लखनऊ में आयोजित इस भव्य समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली कई प्रतिभाशाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। आपको बता दें कि मूर्ति देवी, दिवंगत सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की माता थीं, जबकि मालती देवी उनकी पत्नी और अखिलेश यादव की माता थीं। राजनीतिक गलियारों में सपा अध्यक्ष की इस पहल को आगामी चुनावों के मद्देनजर एक बड़ा महिला कार्ड और महिलाओं को साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। समारोह में सपा सांसद डिंपल यादव भी विशेष रूप से मौजूद रहीं।

इन प्रतिभाओं को मिला सम्मान
समारोह में देश और समाज के लिए मिसाल पेश करने वाली महिलाओं को अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया गया।
ऊदा देवी-झलकारी बाई सम्मान: रोशनी को प्रदान किया गया।
रानी लक्ष्मीबाई सम्मान: भारतीय महिला क्रिकेटर पूनम यादव को मिला।
बेगम हजरत महल सम्मान: सुमन पांडेय को दिया गया।
लीला सेठ सम्मान: नंदनी वर्मा को नवाजा गया।
बेगम अख्तर सम्मान: अनीता गौतम और सुनीता झींगरन को प्रदान किया गया।
सावित्रीबाई फुले सम्मान: रीता चौधरी और कहकसा को मिला।
अहिल्याबाई होल्कर सम्मान: सुनीता यादव को दिया गया।
सावित्री साहनी सम्मान: कमल रहमान को प्रदान किया गया।
कमला चौधरी सम्मान (साहित्य): रेनू यादव को मिला।
कमला देवी चट्टोपाध्याय सम्मान: रिजवाना को दिया गया।

महिलाओं के प्रति सोच बदलनी होगी: अखिलेश यादव
इस मौके पर अपने संबोधन में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने देश और समाज के विकास में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, किसी भी देश और समाज की वास्तविक स्थिति का आकलन वहां की महिलाओं की स्थिति देखकर ही किया जा सकता है।
नए भारत के नारे पर तंज कसते हुए सपा अध्यक्ष ने चिंता जताई, नए भारत में हमारी बेटियां कहीं न कहीं पिछड़ती नजर आ रही हैं। कई मामलों में तो महिलाओं के खिलाफ हो रहे अन्याय को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने उत्तराखंड के अंकिता भंडारी मामले का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। वर्तमान सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में बोलने, लिखने और शांतिपूर्ण आंदोलन करने की स्वतंत्रता सीमित होती जा रही है। उन्होंने पुरुषों को अधिक महत्व देने वाली सामाजिक सोच को बदलने की जरूरत पर जोर दिया।

सत्ता में आने पर महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण होगी प्राथमिकता
अखिलेश यादव ने महिलाओं को भरोसा दिलाया कि जब भी समाजवादी पार्टी को सत्ता में आने का अवसर मिलेगा, महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने सपा शासनकाल में शुरू की गई ‘1090 महिला हेल्पलाइन’, एंबुलेंस सेवा और स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक बेहतर बनाने की बात कही। साथ ही, बेटियों की शिक्षा और महिलाओं की आर्थिक मजबूती के लिए नई और प्रभावी योजनाएं लागू करने का आश्वासन दिया।
अखिलेश ने स्पष्ट शब्दों में कहा, बिना आधी आबादी के सहयोग के देश का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। इस तरह के सम्मान कार्यक्रम महिलाओं को आगे बढ़ने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करते हैं।
महिलाओं को बेड़ियों में बांधने की कोशिश: सांसद डिंपल यादव
वहीं, समारोह को संबोधित करते हुए सपा सांसद डिंपल यादव ने भी महिलाओं की स्थिति पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा, किसी देश को आगे बढ़ने के लिए वहां की बेटियों और महिलाओं को आगे बढ़ाना अनिवार्य है। लेकिन दुखद है कि नए भारत में हमारी बेटियां पिछड़ती जा रही हैं और यहां अन्याय को छिपाने की कोशिश की जा रही है।
अंकिता भंडारी मामले को याद करते हुए डिंपल ने कहा, उत्तराखंड में अंकिता भंडारी के साथ जो हुआ, वह किसी से छिपा नहीं है। पुलिस ने रिसोर्ट पर बुलडोजर चलाकर सारे सुबूत मिटा दिए। उन्होंने आगे कहा, आज भी महिलाओं को बेड़ियों में बांधने का काम किया जाता है, लेकिन यहाँ सम्मानित होने वाली महिलाओं ने अलग राह चुनकर और अपनी प्रतिभा साबित कर बहुत अच्छा किया है।
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