क्या है CAPF Bill, जिसे आज राज्यसभा में पेश करेंगे अमित शाह ?
Sandesh Wahak Digital Desk: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक (CAPF Bill) , 2026 पेश करेंगे। इस विधेयक के जरिए बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी और सीआईएसएफ जैसे अर्धसैनिक बलों में आईजी और उससे ऊपर के पदों पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को लेकर नए नियम तय किए जाएंगे।
SC के फैसले के बाद लाया गया विधेयक
यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट के मई 2025 के उस फैसले के बाद लाया जा रहा है, जिसमें CAPFs में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति कम करने और छह महीने के भीतर कैडर समीक्षा करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने यह भी कहा था कि ऊंचे पदों पर बाहरी नियुक्तियों के कारण CAPF अधिकारियों की पदोन्नति में ठहराव आ रहा है, जिससे उनके मनोबल पर असर पड़ रहा है। वहीं कुछ सेवानिवृत्त CAPF अधिकारियों ने इस मुद्दे को लेकर गृह मंत्रालय के खिलाफ अवमानना याचिका भी दायर की है और आरोप लगाया है कि अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
क्या है इस विधेयक का उद्देश्य?
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में अधिकारियों की भर्ती, प्रतिनियुक्ति, पदोन्नति और सेवा शर्तों को एक समान कानून के तहत विनियमित करना है। फिलहाल सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी जैसे बल अलग-अलग कानूनों के तहत संचालित होते हैं, जिससे प्रशासनिक दिक्कतें और सेवा विवाद बढ़ते हैं। सरकार का मानना है कि एक समान ढांचा लागू होने से इन समस्याओं को कम किया जा सकेगा।
IPS के लिए पदों का प्रस्तावित अनुपात
प्रस्तावित विधेयक के तहत आईजी स्तर के 50 प्रतिशत पद आईपीएस अधिकारियों से भरे जाने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा एडीजी स्तर के कम से कम 67 प्रतिशत पद आईपीएस अधिकारियों को दिए जाएंगे। वहीं एसडीजी और डीजी स्तर के सभी पद प्रतिनियुक्ति के जरिए भरे जाने का प्रस्ताव है।
CAPF बनाम IPS विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला CAPF और IPS अधिकारियों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद से जुड़ा है। CAPF में दो तरह के अधिकारी होते हैं, जिनमें एक ओर इंडियन पुलिस सर्विस के अधिकारी होते हैं, जिन्हें सरकार डेप्युटेशन पर कुछ समय के लिए भेजती है, जबकि दूसरी ओर कैडर अधिकारी होते हैं, जो सीधे CAPF में भर्ती होते हैं। इन कैडर अधिकारियों की भर्ती UPSC द्वारा आयोजित CAPF एसी परीक्षा के माध्यम से होती है। इसी व्यवस्था को लेकर दोनों वर्गों के बीच मतभेद बना हुआ है।
क्या होगा असर ?
संसद की कार्यसूची के अनुसार, इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और एसएसबी जैसे बलों के अलग-अलग नियमों को एक ढांचे में लाना है। इससे प्रशासनिक जटिलताओं को कम करने और बार-बार होने वाली मुकदमेबाजी पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार का तर्क है कि आईपीएस अधिकारियों की मौजूदगी से केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक व्यवस्था के लिए आवश्यक माना जाता है।
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