परिसीमन पर शशि थरूर ने चेताया, बोले- MP नहीं, MLA बढ़ाइए, 850 सीटें लोकतंत्र के लिए खतरा

Shashi Tharoor: देश में प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर करीब 824 से 850 किए जाने की चर्चाओं के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस प्रस्ताव पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि सांसदों की संख्या में इतनी बड़ी बढ़ोतरी लोकतंत्र को मजबूत नहीं, बल्कि कमजोर कर सकती है।

एक अंग्रेजी अखबार में लिखे अपने लेख में थरूर ने कहा कि आबादी बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि संसद में सांसदों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़ा दी जाए। उनके मुताबिक, यह कदम देश की संसदीय व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लंबे समय तक असर डाल सकता है।

‘850 सांसदों वाली लोकसभा बहस नहीं कर पाएगी’

Shashi Tharoor का कहना है कि दुनिया के बड़े लोकतंत्र अपनी संसद का आकार सीमित रखते हैं, ताकि हर सांसद को अपनी बात रखने और कानूनों की गंभीर समीक्षा करने का पर्याप्त अवसर मिल सके। अगर लोकसभा में करीब 850 सांसद होंगे तो बहस में केवल कुछ ही लोगों को बोलने का मौका मिलेगा, जबकि बड़ी संख्या में सांसद सिर्फ मतदान तक सीमित रह जाएंगे।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में संसद कानून बनाने और सरकार से जवाब मांगने वाली संस्था कम, जबकि केवल औपचारिक मंजूरी देने वाला सदन ज्यादा बन जाएगी।

अमेरिका का उदाहरण देकर रखा तर्क

थरूर ने अपने लेख में अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 1929 से प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) की सीटें 435 ही हैं। जबकि उस दौरान देश की आबादी कई गुना बढ़ चुकी है। इसके बावजूद सांसदों की संख्या नहीं बढ़ाई गई, बल्कि संसदीय समितियों, विशेषज्ञ स्टाफ और तकनीकी संसाधनों को मजबूत किया गया ताकि प्रतिनिधित्व भी बना रहे और संसद प्रभावी ढंग से काम करती रहे।

थरूर ने परिसीमन के संभावित राजनीतिक असर पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण की नीति को सफलतापूर्वक लागू किया, उन्हें सीटों के बंटवारे में नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं, अधिक आबादी वाले राज्यों को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलने से संसद का क्षेत्रीय संतुलन बदल सकता है।

उन्होंने इसे केवल सीटों का गणित नहीं, बल्कि संघीय ढांचे और राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व के संतुलन का भी मुद्दा बताया।

‘सांसद नहीं, विधायक बढ़ाइए’: Shashi Tharoor

शशि थरूर का कहना है कि सांसदों की जिम्मेदारी राष्ट्रीय कानून, विदेश नीति, रक्षा, अर्थव्यवस्था और केंद्र सरकार की जवाबदेही तय करना है। वहीं, सड़क, पानी, बिजली और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों की जिम्मेदारी राज्यों और स्थानीय निकायों की होती है।

इसी वजह से उन्होंने सुझाव दिया कि यदि बढ़ती आबादी के कारण प्रतिनिधित्व बढ़ाने की जरूरत महसूस होती है तो लोकसभा में सांसदों की संख्या बढ़ाने के बजाय राज्यों में विधायकों (MLA) की संख्या बढ़ाने पर विचार किया जाना चाहिए।

Shashi Tharoor ने यह भी कहा कि सैकड़ों नए सांसद जोड़ने से वेतन, भत्ते, आवास और अन्य सुविधाओं पर भारी सरकारी खर्च बढ़ेगा। उनकी राय में इस खर्च का उपयोग मौजूदा सांसदों के लिए बेहतर रिसर्च, संसदीय सहायता और आधुनिक संसदीय ढांचा विकसित करने में किया जाना चाहिए। इससे संसद की कार्यक्षमता बढ़ेगी और कानून बनाने की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी होगी।

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