BJP नेता की बेटी ने नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर उठाए सवाल, CJP आंदोलन का किया समर्थन
Yashaswini Raje Singh: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले हुए छात्र आंदोलन को कई वर्गों का समर्थन मिला। इस दौरान उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सदर से पूर्व भाजपा विधायक विक्रम सिंह की बेटी और कंटेंट क्रिएटर यशस्विनी राजे सिंह भी प्रदर्शन में शामिल हुईं। उन्होंने छात्रों के आंदोलन का खुलकर समर्थन किया और केंद्र सरकार द्वारा प्रह्लाद जोशी को नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाए जाने के फैसले पर सवाल उठाए। अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में उन्होंने इस नियुक्ति को “बेहद भद्दा मजाक” बताया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर भी की टिप्पणी
यशस्विनी ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भाषा पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इस्तीफे में कहीं भी जिम्मेदारी स्वीकार करने या पछतावे का भाव नहीं दिखा। उनके मुताबिक, पत्र की भाषा किसी ऐसे व्यक्ति की नहीं थी जो अपनी गलती मान रहा हो, बल्कि वह खुद को “शहीद” की तरह पेश करते नजर आए। गौरतलब है कि प्रधान ने अपने पत्र में लिखा था कि उन्होंने छात्रों के भविष्य की रक्षा और “राष्ट्रविरोधी ताकतों” को हालात का फायदा उठाने से रोकने के लिए इस्तीफा दिया।
36 दिन चला आंदोलन, सोशल मीडिया बना बड़ी ताकत
NEET परीक्षा में कथित धांधली के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन 20 जून से 25 जुलाई तक कुल 36 दिनों तक चला। सरकार द्वारा छात्रों की शेष मांगें स्वीकार करने और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। यशस्विनी ने कहा कि CJP ने मीम्स और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का प्रभावी इस्तेमाल कर बड़ी संख्या में युवाओं को जोड़ा। इस आंदोलन में देशभर के हजारों छात्रों ने हिस्सा लिया और कई विपक्षी दलों ने भी इसका समर्थन किया।
Daughter of a BJP politician, Yashaswinee Raje Singh, tells Al Jazeera why she supports India’s student-led protests and how the Cockroach Janta Party galvanised Gen Z. pic.twitter.com/QhQiTh8EqY
— Al Jazeera English (@AJEnglish) July 29, 2026
यशस्विनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने पिता से राजनीति पर चर्चा नहीं करतीं। उन्होंने बताया कि वह पिछले साढ़े तीन वर्षों से भारत में अकेले रह रही हैं और लंबे समय से अपने पिता के निर्वाचन क्षेत्र फतेहपुर सदर भी नहीं गई हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक माहौल से दूरी ही उन्हें बिना झिझक अपनी बात रखने की आजादी देती है।
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