नेपाल त्रासदी के 8 दिन बाद भी मलबे से निकल रहे शव, 1127 हुआ मौतों का आंकड़ा, 4 हजार से ज्यादा लापता
Nepal Flash Flood Disaster: नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन (Landslide) से मची तबाही के आठ दिन बाद भी राहत और बचाव अभियान जारी है। मलबे के बीच अब भी लोगों की तलाश की जा रही है। नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 1127 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार हजार से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं।
यह त्रासदी 26 अगस्त को उत्तरी नेपाल में तेज बारिश के बाद आई अचानक बाढ़ और बड़े पैमाने पर हुए भूस्खलन से हुई थी। पानी और मलबे ने कई गांवों और कस्बों को अपनी चपेट में ले लिया। बड़ी संख्या में घर, सड़कें और दूसरी इमारतें मलबे में दब गईं।
तीन महीने तक आपदा क्षेत्र घोषित
नेपाल सरकार ने प्रभावित इलाकों को कम से कम तीन महीने के लिए आपदा संकट क्षेत्र (Disaster Crisis Zone) घोषित किया है। इससे राहत और बचाव के लिए जरूरी संसाधनों और टीमों की तैनाती तेजी से की जा सकेगी। सरकार अब बचाव के साथ राहत और पुनर्वास पर भी जोर दे रही है।
चीन मीडिया ग्रुप (CMG) के एक रिपोर्टर ने हेलीकॉप्टर से चीन-नेपाल सीमा के पास ग्यिरोंग-रसुवा क्षेत्र का जायजा लिया। यहां कई गांव और छोटे कस्बे पूरी तरह तबाह नजर आए। स्याब्रुबेंसी भी बुरी तरह प्रभावित है। इलाके में अब राहत और बचाव दल ही नजर आ रहे हैं, जो लगातार मलबे में जिंदगी की तलाश कर रहे हैं।
कुशीनगर में मिले 5 नेपाली नागरिकों के शव
नेपाल में बाढ़ (Nepal Flash Flood Disaster) में बहकर लापता हुए पांच नेपाली नागरिकों के शव उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में गंडक नदी (Gandak River) से बरामद हुए। इनमें दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं। मंगलवार को सभी शव सोनौली बॉर्डर पर नेपाल पुलिस को सौंप दिए गए। अधिकारियों के मुताबिक, शवों को पहचान के लिए नेपाल के बुटवल ले जाया गया है।
उधर, नेपाल और उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के कारण महाराजगंज में भी कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। वाल्मीकिनगर के गंडक बैराज से 1,50,200 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। पिछले 24 घंटे में 33.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है।
मंगलवार दोपहर गंडक नदी का अपस्ट्रीम जलस्तर 355.30 फीट और डाउनस्ट्रीम 352.60 फीट रहा। महाव नाला खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है और इसका जलस्तर नौ फीट पहुंच गया है, जबकि खतरे का निशान पांच फीट है। राप्ती, चंदन और प्यास नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है, हालांकि वे अभी खतरे के निशान से नीचे हैं।
अपर जिलाधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। संवेदनशील इलाकों में राहत-बचाव की तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए गए हैं। महाराजगंज और Nepal से लगे इलाकों में सभी तटबंध फिलहाल सुरक्षित बताए गए हैं।
Also Read: ग्लेशियर टूटने का वीडियो कैमरे में कैद, नेपाल-चीन सीमा पर ऐसे आई तबाही

