Tata Sons में घमासान! चंद्रशेखरन की 5 साल की नियुक्ति को ट्रस्ट ने बताया अवैध, Noel Tata ने किया विरोध
Sandesh Wahak Digital Desk: Tata Group की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक Tata Sons में चेयरमैन पद को लेकर विवाद फिर गहरा गया है। गुरुवार, 17 सितंबर को बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) को पांच साल के नए कार्यकाल के लिए Executive Chairman बनाए रखने का प्रस्ताव बहुमत से मंजूर कर दिया। लेकिन Tata Trusts ने इस फैसले को ही चुनौती दे दी है।
Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata ने बोर्ड बैठक में प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया। Trusts का कहना है कि Tata Sons के Articles of Association के तहत ऐसी नियुक्ति के लिए उसके नॉमिनी डायरेक्टर्स की मंजूरी जरूरी है। इस विरोध के बाद मामला अब बोर्डरूम से निकलकर शेयरधारकों की बैठक तक पहुंचता दिख रहा है।
पहले चंद्रशेखरन ने खुद मना किया था
Tata Trusts के मुताबिक, चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त 2026 को बोर्ड को बताया था कि वह 20 फरवरी 2027 को मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद चेयरमैन पद पर दूसरा कार्यकाल नहीं लेना चाहते। Trusts ने उनके इस फैसले को स्वीकार कर नए चेयरमैन की तलाश के लिए सिलेक्शन कमीटी बनाने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी।
अब ट्रस्ट का तर्क है कि जब चंद्रशेखरन ने खुद दोबारा नियुक्ति के लिए उपलब्ध नहीं होने का फैसला किया और ट्रस्ट ने उसे स्वीकार कर लिया, तो बाद में उसी फैसले को बदलकर पुनर्नियुक्ति करना उचित नहीं है।
Noel Tata ने वोट देकर जताया विरोध
17 सितंबर की बोर्ड बैठक में चार निदेशकों ने चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) के नए कार्यकाल के पक्ष में वोट किया, जबकि Noel Tata ने विरोध में मतदान किया। ट्रस्ट ने इसे “legal nullity” बताते हुए कहा है कि प्रस्ताव Articles of Association के अनुरूप नहीं है।
ट्रस्ट के अनुसार, Noel Tata ने बोर्ड के सामने पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) की कानूनी राय भी रखी थी। ट्रस्ट का दावा है कि इस राय में उसकी आपत्ति के पक्ष में कानूनी आधार बताया गया, लेकिन बोर्ड ने इसे स्वीकार नहीं किया।
अब AGM में होगी अगली बड़ी लड़ाई
Tata Trusts के पास Tata Sons में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। ऐसे में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का मामला अब शेयरधारकों की मंजूरी के चरण में महत्वपूर्ण हो सकता है। चंद्रशेखरन को निदेशक के तौर पर भी दोबारा नियुक्ति के लिए शेयरधारकों की मंजूरी की जरूरत होगी।
यानी बोर्ड की मंजूरी के बावजूद मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। अगली AGM में इस प्रस्ताव पर शेयरधारकों का रुख महत्वपूर्ण होगा। इसी के साथ Tata Sons के नेतृत्व को लेकर Tata Trusts और बोर्ड के बीच टकराव आगे और बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
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