अगले 5 साल तक एन चंद्रशेखरन टाटा संस के चेयरमैन बने रहेंगे, बोर्ड ने प्रस्ताव को मंजूरी दी

Tata Group News : टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को लेकर गुरुवार को बड़ा फैसला हुआ है। मुंबई के बॉम्बे हाउस में हुई बोर्ड बैठक में एन. चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए टाटा संस का एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाए रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही टाटा संस की संभावित लिस्टिंग की दिशा में भी आगे बढ़ने का फैसला हुआ है।

यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि चंद्रशेखरन ने इसी साल अगस्त में मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा चेयरमैन पद नहीं लेने की इच्छा जताई थी। उनका वर्तमान कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होना है। ऐसे में बोर्ड का ताजा फैसला टाटा ग्रुप के नेतृत्व को लेकर पहले से चल रही चर्चाओं को एक नया मोड़ देता है।

नोएल टाटा

नोएल टाटा ने किया विरोध, अब AGM में होगा फैसला

बोर्ड के फैसले के बावजूद मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का विरोध किया है। वहीं टाटा ट्रस्ट्स के एक अन्य नॉमिनी वेंु श्रीनिवासन ने प्रस्ताव का समर्थन किया।

टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। इसलिए बोर्ड की मंजूरी के बाद भी चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को कंपनी की AGM में शेयरधारकों की मंजूरी लेनी होगी। अगर AGM में प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलती है तो बोर्ड का फैसला अंतिम नहीं माना जाएगा।

चंद्रशेखरन की वापसी ऐसे समय में हुई है जब टाटा संस में नेतृत्व को लेकर पहले से ही मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। इसी साल फरवरी में उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने पर सहमति नहीं बन पाई थी और बाद में उन्होंने खुद तीसरा कार्यकाल नहीं लेने की बात कही थी।

Tata Sons की लिस्टिंग की तैयारी भी शुरू

बोर्ड ने टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराने की दिशा में भी आगे बढ़ने का फैसला किया है। इसके पीछे RBI का हालिया फैसला बड़ी वजह है। RBI ने टाटा संस की Core Investment Company के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी है। इसके बाद कंपनी पर लागू नियामकीय नियमों के तहत लिस्टिंग की जरूरत और मजबूत हो गई है।

टाटा संस ने पहले खुद को इस नियम से बाहर रखने की कोशिश की थी, लेकिन RBI के फैसले के बाद अब लिस्टिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की स्थिति बन गई है। रिपोर्टों के मुताबिक बोर्ड इस दिशा में तैयारी शुरू करेगा।

टाटा संस की लिस्टिंग का मुद्दा हालांकि टाटा ग्रुप के भीतर भी पूरी तरह सर्वसम्मत नहीं है। नोएल टाटा संभावित IPO का विरोध कर चुके हैं, जबकि कुछ अन्य ट्रस्ट प्रतिनिधियों ने लिस्टिंग का समर्थन किया है। टाटा संस में शापूरजी पालोनजी ग्रुप की करीब 18.37% हिस्सेदारी भी है और वह लंबे समय से लिस्टिंग के पक्ष में रहा है।

यानी फिलहाल टाटा संस के सामने दो बड़े मुद्दे एक साथ हैं—एन. चंद्रशेखरन की वापसी और कंपनी की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग। दोनों मामलों में बोर्ड ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है, लेकिन अंतिम तस्वीर AGM और आगे की नियामकीय प्रक्रिया के बाद ही साफ होगी।

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