लोन के साथ बीमा लेना जरूरी नहीं होगा, कमीशन और मिस-सेलिंग पर IRDAI कसेगा शिकंजा

Sandesh Wahak Digital Desk : बीमा खरीदने और बेचने के तरीके में आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए दो हिस्सों वाला कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें बीमा कंपनियों के खर्च, एजेंट और डिस्ट्रीब्यूटर के कमीशन, बैंक के जरिए बीमा की बिक्री, मिस-सेलिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े कई प्रस्ताव रखे गए हैं। खास बात यह है कि नियामक ने अलग-अलग बीमा उत्पादों के लिए कमीशन की सीमा तय करने का भी प्रस्ताव दिया है।

लोन लेते समय जबरन बीमा बेचने पर लग सकती है रोक

ग्राहकों के लिहाज से सबसे अहम प्रस्तावों में से एक लोन के साथ बीमा को जोड़ने से जुड़ा है। IRDAI ने प्रस्ताव दिया है कि बैंक या वित्तीय संस्थान लोन देने की शर्त के तौर पर किसी खास बीमा पॉलिसी को खरीदना अनिवार्य न कर सकें। ग्राहक को अपनी जरूरत के मुताबिक बीमा लेने का विकल्प मिलना चाहिए और इसके लिए उसी बैंक या NBFC से बीमा खरीदना जरूरी नहीं होना चाहिए।

साथ ही, बीमा लेने या नहीं लेने की स्थिति में लोन की ब्याज दर और उससे जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से बताने का प्रस्ताव है। थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस जैसे अनिवार्य कवर पर बहुत कम या शून्य कमीशन का भी प्रस्ताव रखा गया है। लोन के साथ बीमा बेचने वाले बैंक और लेंडर्स के लिए प्रोडक्ट के आधार पर कमीशन 2% से 5% तक सीमित करने की बात कही गई है।

लोन के साथ बीमा लेना जरूरी नहीं होगा, कमीशन और मिस-सेलिंग पर IRDAI कसेगा शिकंजा

लाइफ इंश्योरेंस में प्रीमियम अवधि के हिसाब से बदलेगा कमीशन

IRDAI ने इंडिविजुअल लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों के लिए प्रीमियम भुगतान अवधि यानी PPT के आधार पर अलग-अलग कमीशन कैप प्रस्तावित किए हैं। ये लिंक्ड और नॉन-लिंक्ड दोनों तरह की पॉलिसियों पर लागू होने का प्रस्ताव है। 5 साल से कम की PPT वाली पॉलिसी में पहले साल का कमीशन डिस्ट्रीब्यूशन इकाइयों के लिए 5% और एजेंट के लिए 6.25% तक हो सकता है।

5 साल की PPT पर यह सीमा क्रमशः 10% और 12.5%, 6 से 8 साल पर 14% और 17.5%, 9 साल पर 18% और 22.5% तथा 10 साल या उससे ज्यादा की PPT पर 20% और 25% तक प्रस्तावित है।

नियामक का उद्देश्य कमीशन को इस तरह तय करना है कि डिस्ट्रीब्यूटर सिर्फ नई पॉलिसी बेचने पर ध्यान न दें, बल्कि पॉलिसीधारक को लंबे समय तक प्रीमियम जारी रखने में भी मदद करें। सिंगल-प्रीमियम और टैक्स लाभ वाले कुछ बीमा उत्पादों पर कम कमीशन का प्रस्ताव भी रखा गया है।

टर्म, हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस में भी कमीशन पर कैप

प्योर-टर्म इंश्योरेंस में भी प्रीमियम भुगतान के तरीके के आधार पर कमीशन अलग रखने का प्रस्ताव है। सिंगल-प्रीमियम टर्म पॉलिसी में पहले साल का कमीशन डिस्ट्रीब्यूशन इकाइयों के लिए 7.5% और एजेंट के लिए 10% तक हो सकता है। वहीं कई सालों तक प्रीमियम भरने वाली टर्म पॉलिसी में पहले साल यह सीमा क्रमशः 25% और 30% तथा रिन्युअल पर 7.5% और 10% प्रस्तावित है।

हेल्थ इंश्योरेंस में नई पॉलिसी पर डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन 15% से 20% तक सीमित करने और रिन्युअल या पोर्टिंग पर 5% से 10% तक कमीशन रखने का प्रस्ताव है। मोटर इंश्योरेंस में पर्सनल एक्सीडेंट कवर पर कमीशन 5% से 10% तक सीमित करने की बात कही गई है।

बिना मोबाइल नंबर दिए भी देख सकेंगे बीमा की कीमत

IRDAI ने बीमा वेबसाइटों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल होने वाले ‘डार्क पैटर्न’ को रोकने के लिए भी प्रस्ताव रखे हैं। इसके तहत ग्राहक को किसी बीमा उत्पाद की कीमत, फीचर्स या दूसरी जरूरी जानकारी देखने से पहले मोबाइल नंबर या अन्य निजी जानकारी देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा।

प्रस्ताव में बीमा उत्पाद, उसकी कीमत और गुणवत्ता से जुड़ी जानकारी को आसान और एक समान तरीके से उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। साथ ही, IRDAI बीमा खरीदने की प्रक्रिया को ज्यादा डिजिटल और ग्राहक-केंद्रित बनाने के लिए बीमा सुगम और पब्लिक इंश्योरेंस रजिस्ट्री (PIR) जैसी व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव भी कर रहा है।

अभी ये प्रस्ताव हैं, नियम लागू नहीं हुए हैं

यहां सबसे जरूरी बात यह है कि IRDAI के ये सभी बदलाव अभी प्रस्ताव के स्तर पर हैं। इन्हें कंसल्टेशन पेपर में रखा गया है और अंतिम नियम अभी लागू नहीं हुए हैं। IRDAI ने संबंधित पक्षों से इन प्रस्तावों पर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस प्रक्रिया के तहत टिप्पणियां 25 अक्टूबर 2026 तक मांगी गई हैं।

अगर प्रस्तावित बदलाव आगे चलकर अंतिम नियमों का हिस्सा बनते हैं, तो बीमा खरीदते समय ग्राहकों को कीमत और विकल्पों की जानकारी ज्यादा स्पष्ट तरीके से मिल सकती है। साथ ही, लोन के साथ बीमा बेचने की प्रक्रिया, एजेंट और डिस्ट्रीब्यूटर के कमीशन तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों से निजी जानकारी लेने के तरीके में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

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