गर्दन का दर्द कंधे और हाथ तक क्यों पहुंचता है, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

Health Tips: गर्दन और कंधे का दर्द कई बार एक-दूसरे से जुड़ा होता है। व्यक्ति को लगता है कि समस्या कंधे में है, लेकिन दर्द की शुरुआत गर्दन की रीढ़ से हो सकती है। सर्वाइकल स्पाइन की किसी नस पर दबाव या जलन होने पर दर्द गर्दन से शोल्डर ब्लेड, कंधे और हाथ तक फैल सकता है।

एनसीबीआई के अनुसार डिस्क हेरिनेशन, उम्र के साथ रीढ़ में होने वाले बदलाव या बोन स्पर्स की वजह से नर्व रूट पर दबाव पड़ सकता है। इस स्थिति को सर्वाइकल रेडिक्यूलोपैथी कहा जाता है। आम भाषा में इसे पिंच्ड नर्व भी कहा जाता है।

गर्दन का दर्द कंधे और हाथ तक क्यों पहुंचता है, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

इन लक्षणों पर दें ध्यान

इस समस्या में सिर्फ दर्द ही नहीं होता। गर्दन से कंधे तक फैलता दर्द, हाथ या उंगलियों में झुनझुनी, सुन्नपन और हाथ में कमजोरी भी हो सकती है। कई लोगों में गर्दन हिलाने पर दर्द या दूसरे लक्षण बढ़ जाते हैं।

सर्वाइकल नर्व गर्दन से निकलकर कंधे और हाथ के अलग-अलग हिस्सों की संवेदना और मूवमेंट में भूमिका निभाती हैं। इसी वजह से नस पर दबाव होने पर दर्द उसके रास्ते में कहीं भी महसूस हो सकता है।

गर्दन का दर्द कंधे और हाथ तक क्यों पहुंचता है, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

हर कंधे का दर्द गर्दन की वजह से नहीं

यह जरूरी नहीं कि हर कंधे का दर्द सर्वाइकल समस्या के कारण हो। रोटेटर कफ, शोल्डर जॉइंट, टेंडन और बर्साइटिस जैसी समस्याएं भी इसका कारण बन सकती हैं। इसलिए केवल दर्द की जगह देखकर कारण तय नहीं किया जा सकता।

दर्द किस मूवमेंट से बढ़ता है और उसके साथ झुनझुनी, सुन्नपन या कमजोरी है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण है। लगातार ऐसे लक्षण रहने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

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