वेट लॉस के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग कहीं दिल की सेहत न बिगाड़ दे? जानें वजह
Health Tips: वजन कम करने के लिए इन दिनों इंटरमिटेंट फास्टिंग काफी लोकप्रिय है। इसमें 16:8, 5:2 और टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग जैसे तरीके अपनाए जाते हैं। हालांकि, लंबे समय तक खाना न खाने से हर व्यक्ति को एक जैसा फायदा हो, यह जरूरी नहीं है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में प्रकाशित एक रिपोर्ट में 20 हजार से अधिक वयस्कों के खान-पान और फास्टिंग पैटर्न का अध्ययन किया गया। इसमें 16 घंटे फास्ट और 8 घंटे खाने वाले पैटर्न को भी देखा गया। रिपोर्ट ने इंटरमिटेंट फास्टिंग और हार्ट हेल्थ के बीच संभावित संबंधों पर ध्यान खींचा है।
ब्लड शुगर से लेकर ब्लड प्रेशर तक असर
ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के अनुसार डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव का असर ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और हार्ट फंक्शन पर पड़ सकता है। लंबे समय तक फास्टिंग से ब्लड शुगर में बदलाव, कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन में बढ़ोतरी और कोलेस्ट्रॉल-ट्राइग्लिसराइड लेवल में बदलाव हो सकता है।
डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, हार्ट की दवाएं लेने वाले और ईटिंग डिसऑर्डर वाले लोगों को बिना विशेषज्ञ की सलाह के यह डाइट नहीं अपनानी चाहिए। 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को भी खास सावधानी की जरूरत है।
बैलेंस्ड डाइट और पर्याप्त नींद भी जरूरी
NCBI के अनुसार संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी, सब्जियां, फल, साबुत अनाज, नट्स और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ डाइट का हिस्सा होने चाहिए। नियमित एक्सरसाइज और पर्याप्त नींद भी जरूरी है।
फास्टिंग के दौरान ज्यादा कमजोरी, चक्कर, सिरदर्द या धड़कन तेज होने जैसे लक्षण महसूस हों तो डॉक्टर से संपर्क करें। कोई भी नया डाइट प्लान शुरू करने से पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
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