सीढ़ियां चढ़ते ही फूलने लगती है सांस? लगातार सूखी खांसी फेफड़ों की गंभीर बीमारी का संकेत
Health Tips: सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना, लगातार सूखी खांसी रहना या थोड़ी शारीरिक मेहनत के बाद थक जाना अक्सर लोग उम्र बढ़ने, मौसम में बदलाव या कमजोरी से जोड़ते हैं। लेकिन अगर ये परेशानियां लंबे समय तक बनी रहें या धीरे-धीरे बढ़ने लगें, तो इन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ मामलों में ये फेफड़ों की गंभीर बीमारी इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) के संकेत हो सकते हैं।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, IPF फेफड़ों से जुड़ी लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है। इसमें फेफड़ों के अंदर हवा की छोटी थैलियों यानी एल्वियोली के आसपास का टिशू मोटा और सख्त होने लगता है। धीरे-धीरे वहां निशान जैसे टिशू बनने लगते हैं, जिसे फाइब्रोसिस कहते हैं। इससे फेफड़ों से ऑक्सीजन का खून तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है और सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है।
क्या है IPF और फेफड़ों के अंदर कैसे होता है बदलाव?
IPF का पूरा नाम इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस है। इसमें ‘इडियोपैथिक’ का मतलब है कि बीमारी का स्पष्ट कारण पता नहीं है, जबकि ‘पल्मोनरी फाइब्रोसिस’ का अर्थ फेफड़ों के टिशू में निशान बनना और उनका सख्त होना है।
स्वस्थ फेफड़ों में एल्वियोली की पतली दीवारों के जरिए ऑक्सीजन आसानी से खून में पहुंचती है। लेकिन IPF में फेफड़ों के अंदर मौजूद इंटरस्टीशियल टिशू में असामान्य रूप से निशान बनने लगते हैं। इससे टिशू मोटे और कड़े हो सकते हैं और ऑक्सीजन का खून तक पहुंचना प्रभावित होता है।
पल्मोनरी फाइब्रोसिस फाउंडेशन के अनुसार, इस बीमारी में फेफड़ों के टिशू को नुकसान पहुंचने और उसके असामान्य तरीके से ठीक होने की प्रक्रिया के दौरान फाइब्रोसिस विकसित हो सकता है। समय के साथ निशान वाले टिशू बढ़ने पर फेफड़ों का लचीलापन कम हो सकता है।
यह बीमारी हर व्यक्ति में एक जैसी गति से नहीं बढ़ती। कुछ लोगों में बदलाव धीरे-धीरे कई साल में होते हैं, जबकि कुछ मरीजों के फेफड़ों की काम करने की क्षमता तेजी से घट सकती है।
सूखी खांसी, सांस फूलना और थकान कब बनते हैं चिंता की वजह?
मायो क्लिनिक के अनुसार, IPF के शुरुआती लक्षण सामान्य लग सकते हैं। इनमें लगातार सूखी खांसी और खासकर शारीरिक गतिविधि के दौरान सांस फूलना प्रमुख हैं। कुछ लोगों को थकान, तेजी से सांस लेने और बिना कोशिश के वजन घटने की समस्या भी हो सकती है।
उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति पहले आसानी से दो या तीन मंजिल सीढ़ियां चढ़ लेता था, लेकिन अब एक मंजिल चढ़ने पर ही उसकी सांस फूलने लगती है, तो इस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए।
इसी तरह, वायरल संक्रमण के दौरान होने वाली खांसी कुछ दिनों में ठीक हो सकती है। लेकिन अगर सूखी खांसी लंबे समय तक बनी रहे, बार-बार लौटे या धीरे-धीरे बढ़ती जाए, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
फेफड़ों में ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता घटने के कारण शरीर की जरूरत पूरी करना मुश्किल हो सकता है। मांसपेशियों और दूसरे अंगों को काम करने के लिए ऑक्सीजन चाहिए। चलने, सीढ़ियां चढ़ने या व्यायाम के दौरान इसकी जरूरत बढ़ जाती है। IPF में फेफड़े पर्याप्त ऑक्सीजन खून तक नहीं पहुंचा पाते, जिससे सांस फूलने और थकान की परेशानी बढ़ सकती है। बीमारी बढ़ने पर घर के सामान्य काम करते हुए भी सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
IPF के लक्षण दूसरी बीमारियों जैसे क्यों लगते हैं?
अमेरिकन लंग्स एसोसिएशन के मुताबिक, IPF की पहचान करना इसलिए मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण कई दूसरी बीमारियों में भी दिखाई देते हैं। इनमें शामिल हैं:
- अस्थमा
- क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD)
- दिल से जुड़ी बीमारियां
- सांस की नली या फेफड़ों के संक्रमण
- दूसरी इंटरस्टीशियल लंग डिजीज
- हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस
- गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) से जुड़ी खांसी
- कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव
इन बीमारियों में भी खांसी या सांस फूलने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर IPF की पुष्टि नहीं की जा सकती। अमेरिकन लंग्स एसोसिएशन के अनुसार, दूसरी फेफड़ों की बीमारियों से मिलते-जुलते लक्षण होने के कारण पल्मोनरी फाइब्रोसिस की पहचान में देरी या शुरुआती स्तर पर गलत निदान हो सकता है।
लगातार सूखी खांसी, बढ़ती सांस की परेशानी और असामान्य थकान होने पर पल्मोनोलॉजिस्ट यानी फेफड़ों के विशेषज्ञ से जांच कराना महत्वपूर्ण है। समय पर जांच से बीमारी की स्थिति समझने और उपलब्ध उपचार विकल्पों पर सही फैसला लेने में मदद मिल सकती है।
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