जमीन पैमाइश के नाम पर कानूनगो ने ली 15 हजार की रिश्वत, साक्ष्यों के साथ एसडीएम से शिकायत
Balrampur News: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले अभी वकीलों का आंदोलन हाल फिलहाल में ही शांत हुआ है। अधिवक्ताओं का मुख्य रूप से आरोप था कि तहसीलों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार है, जिसकी बानगी का एक 11 सेकंड का वीडियो आज वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति कानून को अपनी जमीन की पक्की पैमाइश करवाने के नाम पर 3000 रुपये घूस देता हुआ नजर आ रहा है। बताया जाता है, जमीन की पैमाइश के नाम पर कानून के द्वारा शिकायतकर्ता से 15000 रुपये की अवैध तरीके से वसूली की गई है। मामला तुलसीपुर तुलसीपुर तहसील से जुड़ा हुआ है। यहां जमीन की पैमाइश कराने के नाम पर एक राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) द्वारा खुलेआम रिश्वत लेने का गंभीर मामला सामने आया है।
तहसील क्षेत्र के ग्राम सिंघनापारा निवासी शफीकुर रहमान अपनी करीब 20-21 बीघा पुश्तैनी जमीन की पक्की हदबरारी और पानी निकासी विवाद के समाधान के लिए पिछले दो वर्षों से प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने धारा 24 के तहत विधिवत आवेदन दिया था, लेकिन मौके पर पहुंचे कानूनगो राम किशोर तिवारी ने पैमाइश करने के एवज में रुपयों की मांग की।
पीड़ित शफीकुर रहमान का कहना है कि कानूनगो राज किशोर तिवारी ने वाहन खर्च और पैमाइश का हवाला देकर कुल 15 हजार रुपये ऐंठ लिए। रुपये के लेन-देन का वीडियो और तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिसमें अधिकारी खुलेआम नोट लेते दिखाई दे रहे हैं। पीड़ित ने बताया कि कानूनगो राजकिशोर तिवारी ने पहले पेट्रोल खर्च के नाम पर दो हजार रुपये लिए और बाद में 15 हजार से कम में पैमाइश न करने की बात कही। अशिक्षित होने का फायदा उठाकर उनसे सरकारी शुल्क के नाम पर यह रकम हड़पी गई।

आरोप है कि मोटी रकम डकारने के बाद भी जमीन की पैमाइश ढंग से नहीं की गई, बल्कि मौके से औपचारिकता निभाकर विपक्षियों से मिलीभगत करते हुए उल्टी और गलत रिपोर्ट दर्ज कर दी गई। जब पीड़ित ने दोबारा पैमाइश की गुहार लगाई तो उन्हें लगातार टरकाया जाता रहा। मामले से क्षुब्ध होकर पीड़ित ने एसडीएम को लिखित शिकायती पत्र सौंपते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, आरोपी कानूनगो के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराने और सख्त विभागीय कार्रवाई की मांग की है।
उक्त मामले पर अपर जिलाधिकारी वित्तीय उम्र राजस्व संदीप केला ने बताया कि पीड़ित के द्वारा मामले को संज्ञान में लाया गया है। जांच करवाकर यदि संबंधित कानूनगो राज किशोर तिवारी दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ विधिक और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी पीड़ित या शिकायतकर्ता से किसी भी सरकारी कर्मचारी का अनुचित लाभ लेना या उसे परेशान करना आचरण नियमावली के खिलाफ है।
रिपोर्ट- योगेंद्र त्रिपाठी
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