विकास की नई बुलंदियों को छू रहा बलरामपुर, 24 हजार करोड़ के निवेश से बनेगा औद्योगिक हब: डॉ. दिलीप अग्निहोत्री
Balrampur News: राज्य सूचना आयुक्त डॉ. दिलीप अग्निहोत्री ने कहा है कि आकांक्षात्मक जनपद बलरामपुर अब तेजी से एक विकसित जिला बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने जनपद के जन सूचना अधिकारियों (पीआईओ) से आह्वान किया कि वे विकास के इस महाभियान में अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करें। तुलसीपुर स्थित चीनी मिल गेस्ट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य सूचना आयुक्त ने जिले में हो रहे बुनियादी ढांचे, औद्योगीकरण और धार्मिक पर्यटन के विकास पर विस्तार से चर्चा की।
बुनियादी ढांचे और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति
डॉ. अग्निहोत्री ने कहा कि बलरामपुर में सड़क और रेलवे कनेक्टिविटी को लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया जा रहा है। गोंडा, बहराइच और तुलसीपुर मार्ग को आपस में जोड़ने के लिए आउटर रिंग रोड का निर्माण किया जा रहा है। जिले में मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, और विश्वविद्यालय बनने का सपना भी अब जल्द ही साकार होने जा रहा है।
24 हजार करोड़ के निवेश से बनेगा औद्योगिक हब
जिले की औद्योगिक क्षमता का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि बलरामपुर जल्द ही एक प्रमुख औद्योगिक हब के रूप में अपनी पहचान बनाएगा। यहां करीब 24 हजार करोड़ रुपये का निवेश होने जा रहा है। इसके साथ ही, ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना के तहत चयनित यहां की मसूर दाल (रानी मसूर और मलका मसूर) अपनी बेहतरीन ब्रांडिंग के चलते अब पश्चिम बंगाल के साथ-साथ बांग्लादेश जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रही है।
सिक्स लेन हाईवे बनेगा बाढ़ से ढाल
राप्ती नदी के तटीय इलाकों में हर साल आने वाली बाढ़ की समस्या पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि ‘शामली-गोरखपुर-पानीपत’ सिक्स-लेन हाईवे का निर्माण इन गांवों को बाढ़ के खतरे से बचाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
देवीपाटन धाम में सुविधाओं का हो रहा विस्तार
तीर्थाटन को मिल रहे प्रोत्साहन पर प्रकाश डालते हुए डॉ. अग्निहोत्री ने कहा कि बलरामपुर की पहचान इसके आस्था के प्रमुख केंद्र ‘देवीपाटन मंदिर’ से है, जहां श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।
तुलसीपुर में स्थित यह मंदिर माता दुर्गा के प्रसिद्ध 51 शक्तिपीठों में से एक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां माता सती का ‘दाहिना स्कंध’ (कंधा) और पट (वस्त्र) गिरा था। इसी ‘पट’ के गिरने के कारण इस पवित्र स्थान का नाम ‘देवीपाटन’ पड़ा। पौराणिक कथाओं में भी इस स्थान का गहरा महत्व है; ऐसा माना जाता है कि महाभारत काल में दानवीर कर्ण ने यहीं स्थित ‘सूर्यकुंड’ में स्नान कर भगवान सूर्य की कठोर उपासना की थी और अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा प्राप्त की थी।
रिपोर्ट- योगेंद्र विश्वनाथ त्रिपाठी
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