Balrampur News: सरकारी तालाब और बंजर भूमि पर मदरसा निर्माण का मामला गरमाया, संचालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग

Balrampur News: जिले में छांगुर प्रकरण की तपिश अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुई थी कि सरकारी और जल संरक्षण की जमीन पर अवैध कब्जे का एक और गंभीर मामला सामने आ गया है। सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम सभा अड़ार पाकड़ में राजस्व अभिलेखों में बंजर व पानी के रूप में दर्ज सार्वजनिक भूमि पर पक्का भवन बनाकर मदरसा और उर्दू कोचिंग सेंटर संचालित करने का आरोप लगा है। ग्रामीणों द्वारा जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपने के बाद हरकत में आए प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है, वहीं शिकायत दर्ज होते ही कथित मदरसे पर ताला लटक गया है और संचालक फरार बताया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम सभा अड़ार पाकड़ स्थित गाटा संख्या 1241क, 1241ख और 1242 को लेकर 15 जुलाई 2026 को महेश कुमार पाण्डेय, जगदम्बाप्रसाद, राकेश तिवारी, बालकराम शुक्ल और रूपेश मिश्रा ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा। पत्र में आरोप लगाया गया कि राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 1241क और 1241ख बंजर खाते में तथा गाटा संख्या 1242 जल क्षेत्र यानी पानी की श्रेणी में दर्ज है। इस सार्वजनिक जमीन पर नियमों की अनदेखी कर पक्का निर्माण कराया गया और उसमें मदरसा व उर्दू कोचिंग सेंटर चलाया जाने लगा। शिकायतकर्ताओं ने जमीन के सीमांकन, निर्माण की अनुमति व संचालन दस्तावेजों की जांच कराते हुए संचालक छेददन के खिलाफ विधिक कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता महेश कुमार पांडे ने कहा कि पूर्व में बारावफ़ात के कार्यक्रम के दौरान बाहरी लोगों द्वारा हथियार लहराए गए थे, जिससे भविष्य में असामाजिक गतिविधियों के पनपने की आशंका है। उन्होंने अवैध निर्माण पर तत्काल बुलडोजर चलाने की मांग की। सामाजिक कार्यकर्ता रूपेश मिश्रा ने कहा कि बलरामपुर एक संवेदनशील सीमावर्ती इलाका है, जहां आबादी का संतुलन बदलने और सार्वजनिक तालाब की जमीन पर बिना अनुमति धार्मिक ढांचा खड़ा करने जैसी गतिविधियां स्वीकार्य नहीं हैं। वहीं शिकायतकर्ता वीडी जायसवाल ने कहा कि तालाब और जल स्रोत की भूमि पशु-पक्षियों व जल संरक्षण के लिए होती है, इसलिए सीमावर्ती क्षेत्र में सरकारी जमीन पर हुए इस अवैध निर्माण को जांच कराकर तुरंत ढहाया जाना चाहिए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर तहसीलदार ने बताया कि प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासनिक टीम राजस्व अभिलेखों, स्थलीय सीमांकन और निर्माण की वैधानिकता की पड़ताल कर रही है। बंजर व पानी की जमीन पर कब्जे की पुष्टि होने पर अवैध निर्माण को ढहाकर जमीन को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाएगा।

रिपोर्ट- योगेंद्र त्रिपाठी

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