‘2,000 करोड़ का बजट, खर्च हुए सिर्फ 29 करोड़’, कांग्रेस सांसद ने खोली ‘PM इंटर्नशिप स्कीम’ की पोल!
PM Internship Scheme: कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के भाषण को लेकर PM इंटर्नशिप स्कीम (PMIS) की जमीनी स्थिति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति की 40वीं रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर देने के लिए शुरू की गई इस योजना में आवंटित राशि का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हो पाया।
टैगोर के मुताबिक, PM Internship Scheme को पांच वर्षों में एक करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण देने के लक्ष्य के साथ करीब ₹63,000 करोड़ के आवंटन के साथ शुरू किया गया था। उनका दावा है कि 2024-25 में योजना के लिए ₹2,000 करोड़ आवंटित किए गए थे, लेकिन इनमें से सिर्फ ₹29.29 करोड़ ही खर्च हुए। यानी उनके मुताबिक करीब 98.5 फीसदी राशि इस्तेमाल नहीं हो सकी।
2.45 लाख अवसर, लेकिन 16 हजार ही जुड़े
मणिकम टैगोर ने दावा किया कि इंडस्ट्री पार्टनर्स के जरिए करीब 2.45 लाख इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन इनमें से सिर्फ 16,060 उम्मीदवार ही वास्तव में योजना में शामिल हुए। उन्होंने यह भी दावा किया कि शामिल होने वाले युवाओं में करीब 53.6 फीसदी ने बीच में ही इंटर्नशिप छोड़ दी।
कांग्रेस सांसद ने इसके पीछे कम स्टाइपेंड और आने-जाने व रहने से जुड़ी पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने को प्रमुख वजह बताया। उनका कहना है कि इसका असर खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं और महिला उम्मीदवारों पर पड़ा।
टैगोर ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार प्रचार पर जोर दे रही है, लेकिन योजनाओं (PM Internship Scheme) के लिए आवंटित फंड के प्रभावी इस्तेमाल और युवाओं की वास्तविक समस्याओं को दूर करने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।
PM मोदी ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां
वहीं, 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए Indian Railways Electrification का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि रेलवे में इलेक्ट्रिफिकेशन की शुरुआत 1925 में हुई थी, लेकिन अगले करीब 90 वर्षों में नेटवर्क का लगभग 30 फीसदी हिस्सा ही विद्युतीकृत हो पाया था।
प्रधानमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार ने करीब एक दशक में बाकी बड़े हिस्से का इलेक्ट्रिफिकेशन पूरा किया। रेलवे बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, 70,142 ब्रॉड-गेज रूट किलोमीटर में से 99.6 फीसदी हिस्से का इलेक्ट्रिफिकेशन हो चुका है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, 2014 से पहले 21,801 रूट किलोमीटर का इलेक्ट्रिफिकेशन हुआ था, जबकि 2014 से 2026 के बीच 48,072 रूट किलोमीटर का विद्युतीकरण किया गया। मंत्रालय ने यह भी बताया कि रेलवे में डीजल की खपत 2015-16 के करीब 293 करोड़ लीटर से घटकर 2024-25 में लगभग 108 करोड़ लीटर रह गई है।
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