डमी स्कूलों पर सख्ती की तैयारी, CBSE से औचक निरीक्षण कराने की सिफारिश
CBSE Dummy Schools: केंद्रीय सूचना आयोग ने डमी दाखिलों के बढ़ते चलन पर चिंता जताते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध स्कूलों में औचक निरीक्षण कराने की सिफारिश की है। इसका उद्देश्य स्कूलों में अनिवार्य उपस्थिति के नियमों का पालन सुनिश्चित करना और संबद्धता की शर्तों के उल्लंघन को रोकना है।
सूचना आयुक्त सुधा रानी रेलंगी ने हाल ही में जारी एक आदेश में यह सिफारिश की। मामला एक शिकायत से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कुछ छात्रों को नियमित कक्षाओं में उपस्थित हुए बिना ही डमी प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे थे।
आरटीआई के जरिए उठाया गया था मामला
यह शिकायत भोपाल के निजी मिशनरी स्कूलों में उपस्थिति के अनिवार्य नियमों की जानकारी मांगने वाले एक आरटीआई आवेदक ने दर्ज कराई थी। आवेदक ने विषयों के चयन और निर्धारित पाठ्यपुस्तकों से जुड़े बोर्ड के नियमों की जानकारी भी मांगी थी।
शिकायतकर्ता ने केंद्रीय सूचना आयोग को बताया कि उसने आरटीआई आवेदन के जरिए डमी दाखिलों का खुलासा करने की कोशिश की थी। आरोप था कि ऐसे दाखिलों में छात्र नियमित रूप से कक्षाओं में शामिल हुए बिना ही परीक्षा के परिणाम हासिल कर लेते हैं।
डमी दाखिले या डमी स्कूल ऐसी व्यवस्था को कहा जाता है, जिसमें छात्र का नाम स्कूल के रजिस्टर में दर्ज रहता है, लेकिन वह नियमित रूप से स्कूल नहीं जाता और कक्षाओं में उपस्थित नहीं होता।
जेईई-नीट की तैयारी करने वाले छात्र भी लेते हैं दाखिला
डमी स्कूलों में आम स्कूलों की तरह दाखिला तो होता है, लेकिन छात्रों को नियमित कक्षाओं में आने की जरूरत नहीं पड़ती। इस व्यवस्था का इस्तेमाल अक्सर जेईई मेन, जेईई एडवांस और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र करते हैं। इन्हें नॉन-अटेंडिंग स्कूल भी कहा जाता है।
कई छात्र अपने गृह राज्य के स्कूलों में दाखिला लेते हैं, जबकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोटा जैसे शहरों में कोचिंग करते हैं। वे ज्यादातर समय स्कूल नहीं जाते और सीधे बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होते हैं। आरोप है कि कुछ स्कूल ऐसे छात्रों को रिकॉर्ड में उपस्थित दिखा देते हैं, जबकि वे वास्तव में कक्षाओं में नहीं आते।
डमी स्कूलों को लेकर कई विशेषज्ञ भी चिंता जता चुके हैं। उनका मानना है कि नियमित रूप से स्कूल नहीं जाने से छात्रों के व्यक्तिगत विकास पर असर पड़ सकता है। ऐसे छात्र सामाजिक रूप से अलग-थलग पड़ सकते हैं और तनाव भी महसूस कर सकते हैं।
केंद्रीय सूचना आयोग की सिफारिश के बाद अब सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में उपस्थिति के नियमों के पालन और डमी दाखिलों से जुड़े आरोपों की जांच पर ध्यान केंद्रित होने की उम्मीद है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में औचक निरीक्षण की समय-सीमा या किसी स्कूल के खिलाफ कार्रवाई का विवरण नहीं दिया गया है।

