ट्रंप राष्ट्रपति तो बने रहेंगे, लेकिन नहीं चलेगी मनमानी! मिडटर्म चुनाव के बाद इन 5 ताकतों पर लगेगी लगाम
US Midterm Election Results 2026: अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की रिपब्लिकन पार्टी को करारा झटका लगा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट, दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इससे ट्रंप के राष्ट्रपति पद पर कोई खतरा नहीं है, लेकिन उनके लिए सरकार चलाना पहले जैसा आसान नहीं रहेगा।
ट्रंप जनवरी 2029 तक राष्ट्रपति बने रहेंगे और उनके पास कार्यकारी अधिकार भी रहेंगे। हालांकि, जनवरी 2027 में नई कांग्रेस के कार्यभार संभालने के बाद डेमोक्रेट्स के पास उनके एजेंडे को रोकने और प्रशासन पर सवाल उठाने के कई संवैधानिक अधिकार होंगे।
ट्रंप के सामने खड़ी होंगी ये 5 बड़ी मुश्किलें
1. अपने एजेंडे से जुड़े कानून पास कराना होगा मुश्किल
अमेरिका में नए संघीय कानून बनाने के लिए हाउस और सीनेट, दोनों की मंजूरी जरूरी होती है। अब दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का बहुमत होने से ट्रंप के MAGA एजेंडे और दूसरे विधायी प्रस्तावों को आसानी से मंजूरी नहीं मिलेगी। हालांकि राष्ट्रपति किसी बिल पर वीटो लगा सकते हैं, लेकिन कांग्रेस दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से इसे पलट सकती है।
2. सरकारी बजट और प्रोजेक्ट्स की फंडिंग पर लगेगा ब्रेक
कांग्रेस के पास सरकारी खर्च और बजट को मंजूरी देने का अधिकार है। डेमोक्रेट्स ट्रंप की बॉर्डर वॉल और दूसरी प्रमुख योजनाओं के लिए फंडिंग रोकने या उसमें कटौती करने की कोशिश कर सकते हैं। बजट पर टकराव बढ़ने से सरकारी कामकाज ठप होने यानी शटडाउन का खतरा भी पैदा हो सकता है।
3. ट्रंप प्रशासन के खिलाफ जांच और महाभियोग की तैयारी
डेमोक्रेट्स अब संसदीय समितियों के जरिए ट्रंप प्रशासन के फैसलों की जांच कर सकते हैं। अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है और दस्तावेजों के लिए समन जारी हो सकते हैं। हाउस में ट्रंप के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव भी लाया जा सकता है। हालांकि राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए सीनेट में मौजूद सदस्यों के दो-तिहाई वोट जरूरी होंगे।
4. जजों और बड़े सरकारी पदों पर नियुक्तियां आसान नहीं होंगी
सुप्रीम कोर्ट के जजों, संघीय न्यायाधीशों और कई वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियों के लिए सीनेट की मंजूरी जरूरी होती है। अब सीनेट में डेमोक्रेट्स का बहुमत होने से ट्रंप के पसंदीदा उम्मीदवारों की नियुक्ति अटक सकती है या उन्हें कड़ी जांच का सामना करना पड़ सकता है।
5. विदेश नीति और सैन्य फैसलों पर बढ़ेगी संसद की निगरानी
राष्ट्रपति के पास सेना के कमांडर-इन-चीफ और कूटनीति से जुड़े अधिकार बने रहेंगे। लेकिन युद्ध के लिए फंडिंग, सैन्य खर्च और अंतरराष्ट्रीय संधियों जैसे मामलों में कांग्रेस और सीनेट की भूमिका अहम है। ऐसे में ईरान समेत दूसरे देशों से जुड़े ट्रंप के फैसलों पर डेमोक्रेट्स दबाव बना सकते हैं।
क्या ट्रंप की राष्ट्रपति की कुर्सी पर भी खतरा है?
फिलहाल ऐसा नहीं है। मिडटर्म चुनाव में हारने से राष्ट्रपति को पद छोड़ना नहीं पड़ता। ट्रंप जनवरी 2029 तक व्हाइट हाउस में रहेंगे। उनके पास वीटो, कार्यकारी आदेश, सेना की कमान और संघीय अपराधों में माफी देने जैसे अधिकार बने रहेंगे।
रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रंप ने चुनावी नतीजों (US Midterm Election Results 2026) के बाद डेमोक्रेट्स को जीत की बधाई दी है और उनके साथ काम करने की बात कही है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि डेमोक्रेट्स के प्रस्तावों पर जरूरत पड़ने पर वीटो का इस्तेमाल करेंगे। यानी अब अमेरिका में राष्ट्रपति और संसद के बीच टकराव बढ़ने की पूरी संभावना है।

