अमेरिकी मिड टर्म चुनाव में भारतीय मूल के नेताओं का जलवा, पिया डंडिया, सुहास सुब्रमण्यम और अरुणा मिलर ने लहराया परचम

Sandesh Wahak Digital Desk: अमेरिका में आयोजित 2026 के मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों के रुझानों और नतीजों में भारतीय-अमेरिकी नेताओं का दबदबा देखने को मिल रहा है। डेमोक्रेटिक पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ रहे भारतीय मूल के प्रमुख नेताओं पिया डंडिया, सुहास सुब्रमण्यम और अरुणा मिलर ने शानदार जीत दर्ज करते हुए अमेरिकी राजनीति में अपनी पैठ को और मजबूत किया है।

पिया डंडिया की फ्लोरिडा से ऐतिहासिक जीत

फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रत्याशी पिया डंडिया ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के चुनाव में शानदार सफलता हासिल की है। पूर्व हाई स्कूल प्रिंसिपल और शिक्षिका रहीं डंडिया ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी रिपब्लिकन पार्टी के मरीन वेटरन केसी अस्कार को कड़े मुकाबले में मात दी। भारतीय प्रवासियों की बेटी पिया डंडिया की इस जीत के साथ ही वे पहली बार अमेरिकी कांग्रेस की सदस्य चुनी गई हैं। उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में आम जनता की महंगाई कम करने, शिक्षा और किफायती आवास को मुख्य मुद्दा बनाया था।

सुहास सुब्रमण्यम और अरुणा मिलर की धमाकेदार वापसी

वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से 40 वर्षीय सुहास सुब्रमण्यम ने एक बार फिर जीत का परचम लहराया है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार रह चुके सुहास ने लगभग 63% वोट हासिल कर रिपब्लिकन प्रत्याशी डेव बेकविथ को करारी शिकस्त दी। दूसरी ओर, हैदराबाद में जन्मीं भारतीय-अमेरिकी नेता अरुणा मिलर मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में पुनः निर्वाचित हुई हैं। गवर्नर वेस मूर के साथ चुनावी मैदान में उतरीं मिलर ने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी को हराकर राज्य के शीर्ष कार्यकारी पद पर अपनी जगह बरकरार रखी है।

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के ठीक दो साल बाद होने वाले मिडटर्म (मध्यावधि) चुनाव सत्ताधारी दल और राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस) के कार्यकाल की कार्यशैली पर एक तरह से ‘जनमत संग्रह’ माने जाते हैं। ये चुनाव ट्रंप प्रशासन के लिए निम्नलिखित कारणों से बेहद महत्वपूर्ण हैं।

संसद (कांग्रेस) के नियंत्रण की लड़ाई: मध्यावधि चुनाव में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House) की सभी 435 सीटों और सीनेट की एक-तिहाई सीटों पर वोट डाले जाते हैं। यदि विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत मिलता है, तो राष्ट्रपति ट्रंप के लिए नए कानून बनाना, नीतियां पारित कराना और बजट पास कराना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

महंगाई और आर्थिक नीतियों का आंकलन: अमेरिकी जनता इस चुनाव के माध्यम से ट्रम्प प्रशासन द्वारा लागू की गई टैरिफ नीतियों, महंगाई नियंत्रण, रोजगार और टैक्स व्यवस्था पर अपना प्रत्यक्ष फैसला सुनाती है।

महाभियोग और जांच का खतरा: यदि प्रतिनिधि सभा में विपक्ष (डेमोक्रेट्स) का नियंत्रण होता है, तो वे ट्रम्प प्रशासन के फैसलों, नीतियों और कार्यकारी आदेशों की संसदीय जांच शुरू कर सकते हैं।

2028 के राष्ट्रपति चुनाव की दिशा: इन नतीजों से यह तय होता है कि आगामी 2028 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले देश में किस राजनीतिक दल की लहर है।

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