आकाश आनंद को जिम्मेदारी देने के लिए मायावती ने रखी शर्त, पहले ससुर अशोक सिद्धार्थ लें राजनीति से संन्यास
Lucknow News: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद और उनके ससुर पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ को लेकर एक बड़ा रणनीतिक बयान दिया है। मायावती ने साफ शब्दों में कहा कि यदि अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लेते हैं, तभी आकाश आनंद का स्वतंत्र होकर पार्टी में काम करना संभव हो पाएगा। उन्होंने संकेत दिए कि ऐसा होने पर ही पार्टी आकाश आनंद को उनकी पुरानी जिम्मेदारियों पर वापस लाने के लिए सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी 4 बिंदुओं के विस्तृत बयान में बसपा प्रमुख ने लिखा कि पार्टी अपने शीर्ष नेतृत्व के फैसलों के तहत भटके हुए लोगों को सुधार का मौका देकर वापस शामिल कर रही है। हालांकि, जो लोग इसमें बाधा डालते हैं उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है, जिसका ताजा उदाहरण अशोक सिद्धार्थ हैं। मायावती ने आरोप लगाया कि अशोक सिद्धार्थ को सुधरने के कई मौके दिए गए, लेकिन उन्होंने पार्टी मूवमेंट से ज्यादा अपने निजी, पारिवारिक स्वार्थ और राजनीतिक महत्वाकांक्षा को प्राथमिकता दी। इसी वजह से उन्हें और उनके दामाद आकाश आनंद दोनों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड व पंजाब में विधानसभा का आमचुनाव अब बहुत नज़दीक है और ये तीनों ही राज्य, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के ’बहुजन समाज’ को ’शोषित से शासक वर्ग’ बनने हेतु उनके आत्म-सम्मान एवं स्वाभिमान के कारवाँ को आगे बढ़ाने के लिये…
— Mayawati (@Mayawati) September 9, 2026
राजनीति से पूरी तरह संन्यास लें अशोक सिद्धार्थ
मायावती ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ को बसपा मूवमेंट के लिए बड़ा त्याग और समर्पण दिखाना चाहिए था, लेकिन उन्होंने ठीक इसके उलट काम किया। बसपा प्रमुख ने उन्हें सलाह दी कि अपने परिवार और दामाद आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनके पास अभी भी सुधार का मौका है। वे तुरंत अपनी महत्वाकांक्षाओं को त्यागकर राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेने का ऐलान करें। इसके बाद ही आकाश आनंद पार्टी में बेफिक्र होकर काम कर सकेंगे और कार्यकर्ताओं की आम राय के मुताबिक उन्हें सक्रिय भूमिका सौंपी जा सकेगी।
आगामी चुनावी प्राथमिकताओं का जिक्र करते हुए मायावती ने लिखा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव बेहद करीब हैं। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के बहुजन आंदोलन और शोषित वर्ग को शासक वर्ग बनाने के संकल्प के लिए ये तीनों राज्य बसपा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी छोटे-बड़े कार्यकर्ता, पदाधिकारी और समर्थक हर प्रकार का त्याग देकर पूरी निष्ठा के साथ सत्ता प्राप्ति के मिशन में जुटे हुए हैं।
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