NHAI ने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे किया टोल फ्री, 20 दिन में छह जगह धंसी सड़क, तो रोकी वसूली
Kanpur Lucknow Expressway: कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सड़क बार-बार उखड़ने और निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवालों के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सख्त कार्रवाई की है। एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड के खिलाफ “नॉन परफॉर्मर” घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इसके साथ ही, क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत पूरी होने तक एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली भी रोक दी गई है, यानी फिलहाल यात्रियों को टोल नहीं देना होगा।
जुलाई और अगस्त में Kanpur Lucknow Expressway के करीब आठ स्थानों पर सड़क धंसने और डामर उखड़ने की घटनाओं के बाद एनएचएआई ने पूरे मामले की समीक्षा की। शुरुआती जांच में निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल सामने आए।
PNC पर सख्त कार्रवाई की तैयारी
NHAI ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों न की जाए। प्रस्तावित कार्रवाई में कंपनी की रेटिंग घटाना, प्रदर्शन सुरक्षा राशि का दो प्रतिशत जुर्माना और भविष्य की परियोजनाओं में प्रतिबंध जैसे कदम शामिल हैं।
इसके अलावा, क्षतिग्रस्त सड़क का दोबारा निर्माण पीएनसी अपने खर्च पर करेगी, जिसकी अनुमानित लागत करीब 3 करोड़ रुपये बताई गई है। मरम्मत पूरी होने तक टोल से होने वाले नुकसान की भरपाई भी कंपनी से वसूली जाएगी।
अधिकारियों और इंजीनियरों पर भी गिरी गाज

NHAI ने प्रोजेक्ट से जुड़े कई अधिकारियों और इंजीनियरों पर भी कार्रवाई शुरू कर दी है। परियोजना निदेशक को मूल विभाग भेज दिया गया है, जबकि पूर्व परियोजना निदेशक समेत जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र जारी करने का फैसला लिया गया है।
निर्माण की निगरानी करने वाली स्वतंत्र इंजीनियरिंग एजेंसी और उसके अधिकारियों पर भी भविष्य की सरकारी परियोजनाओं से प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
IIT खड़गपुर करेगी तकनीकी जांच
Kanpur Lucknow Expressway की सड़क बार-बार क्यों उखड़ी, इसकी वजह जानने के लिए आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर केएस रेड्डी की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति बनाई गई है। समिति सड़क की डिजाइन, निर्माण सामग्री, जल निकासी व्यवस्था और गुणवत्ता नियंत्रण की विस्तृत जांच करेगी।
साथ ही, पूरे एक्सप्रेसवे की लेजर प्रोफाइलोमीटर तकनीक से जांच कराई जाएगी, ताकि सड़क की सतह में मौजूद सूक्ष्म खामियों और छिपे दोषों का भी पता लगाया जा सके।
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