राज्यसभा में मनुस्मृति पर खरगे के बयान से हंगामा, जेपी नड्डा और सुधांशु त्रिवेदी ने जताई आपत्ति
Parliament News: राज्यसभा में गुरुवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है। खरगे ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक हुए, लेकिन अब तक एक भी दोषी को सजा नहीं मिली। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतनी घटनाओं के दौरान सरकार और जांच एजेंसियां क्या कर रही थीं।
शिक्षा और आरएसएस को लेकर दिए बयान
खरगे ने कहा कि शिक्षा किसी एक वर्ग का विशेषाधिकार नहीं होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा समय में शैक्षणिक संस्थानों पर आरएसएस का प्रभाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा पर जीडीपी का 6 प्रतिशत खर्च होना चाहिए, जबकि सरकार केवल करीब 3 प्रतिशत खर्च कर रही है। उनके अनुसार, इससे शिक्षा का निजीकरण बढ़ रहा है और गरीब, दलित व वंचित वर्ग के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
इसके बाद खरगे ने मनुस्मृति का हवाला देते हुए कुछ कथित अंश पढ़े और आरोप लगाया कि ऐसी सोच को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आपत्तिजनक सामग्री को पाठ्यक्रम से हटाया जाना चाहिए। इस बयान के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार विरोध किया।
नड्डा और सुधांशु त्रिवेदी ने जताई आपत्ति
केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने खरगे के बयान को तथ्यों से परे बताते हुए कहा कि इससे समाज में अशांति फैल सकती है। उन्होंने खरगे से अपने दावों का प्रमाण देने और मनुस्मृति की मूल प्रति प्रस्तुत करने को कहा। सभापति ने भी संबंधित दावों को प्रमाणित करने को कहा और मनुस्मृति से जुड़े बयान को रिकॉर्ड से हटाने की बात कही।
इसके बाद भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने पूर्व न्यायाधीश विलियम जोंस और डॉ. भीमराव आंबेडकर की पुस्तकों का हवाला देते हुए तथ्यों की पुष्टि की मांग की। वहीं कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने एक पुस्तक दिखाते हुए कहा कि यह प्रकाशित पुस्तक है और इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
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