कानपुर में जुटे दिग्गज शिशु रोग विशेषज्ञ, किशोरों के बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य पर जताई गहरी चिंता
Kanpur News: होटल रीजेंटा में आज एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AOP) कानपुर की ओर से सेंट्रल आईएपी वर्कशॉप का आयोजन किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुई इस कार्यशाला में कानपुर और आसपास के जिलों से आए करीब 40 नामचीन पीडियाट्रिशियन (शिशु रोग विशेषज्ञों) ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में देश के जाने-माने एक्सपर्ट्स डॉ. पियाली भट्टाचार्य, डॉ. शालिनी भसीन और डॉ. अमितेश यादव ने टीनएजर्स के बिहेवियर और उनकी मेंटल हेल्थ से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर अपनी बात रखी। वहीं, डॉ. राज तिलक ने सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी (HPV) वैक्सीन को समय पर लगवाने पर जोर दिया।
हर 7 में से 1 किशोर मेंटल डिसऑर्डर का शिकार
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के हवाले से चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए। एक्सपर्ट्स ने बताया कि दुनियाभर में 10 से 19 साल के हर 7 किशोरों में से 1 किसी न किसी मानसिक विकार से जूझ रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि 50 फीसदी मानसिक बीमारियों की शुरुआत 14 साल की उम्र से पहले ही हो जाती है, जबकि 75 प्रतिशत समस्याएं 24 साल की उम्र तक पैर पसार लेती हैं। समय पर इलाज न मिलने के कारण 15 से 29 साल के युवाओं में आत्महत्या मौत का एक बेहद बड़ा कारण बनती जा रही है, जिसे सही काउंसलिंग से रोका जा सकता है।
डॉक्टरों ने बताया कि आज के दौर में बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया का नशा, पढ़ाई का प्रेशर, साइबर बुलिंग और नशे की लत उनके मानसिक संतुलन को बिगाड़ रही है। यदि बच्चा अचानक गुमसुम रहने लगे, चिड़चिड़ा हो जाए, पढ़ाई से मन चुराने लगे या उसे नींद न आए, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों से हर दिन खुलकर बात करें, उनका स्क्रीन टाइम कम करें और उन्हें आउटडोर गेम्स के लिए प्रेरित करें।
मानसिक बीमारी कोई सामाजिक कलंक नहीं
एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स कानपुर के प्रेसिडेंट डॉ. जेके गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि किशोरों की मानसिक दिक्कतों को समाज में कलंक या टैबू नहीं माना जाना चाहिए। समय पर इसकी पहचान और इलाज करना हम सबकी जिम्मेदारी है क्योंकि मानसिक रूप से मजबूत बच्चे ही देश का भविष्य हैं। अंत में एकेडमी के सेक्रेटरी डॉ. शैलेन्द्र गौतम ने सभी डॉक्टरों का धन्यवाद करते हुए भविष्य में भी बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए ऐसे जागरूक कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प दोहराया।
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