CBI ने धोखाधड़ी मामले में सुभाष चंद्रा के खिलाफ दर्ज किया एफआईआर, NCLAT से भी झटका
Sandesh Wahak Digital Desk: मीडिया कारोबारी और एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा को लोन माफी विवाद के बाद एक और बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने 2018 से 2026 के बीच LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के साथ 1322 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में उनके खिलाफ केस दर्ज किया है। LICHFL का आरोप है कि 2018 में 59,113 करोड़ रुपये की नेटवर्थ दर्शाने वाले सुभाष चंद्रा ने 2024 तक अपनी नेटवर्थ घटाकर महज 31.79 करोड़ रुपये बता दी।
NCLAT ने 99.9% लोन माफी और संपत्ति बेचने पर लगाई रोक
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) की पांच सदस्यीय विशेष पीठ (अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल) ने सुभाष चंद्रा की संपत्तियां बेचने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही, NCLAT ने 22,006 करोड़ रुपये के कर्ज दावों को महज 6.5 करोड़ रुपये में सैटल (99.9% की छूट) करने वाले NCLT के आदेश को भी निलंबित कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि री-पेमेंट योजना पर स्पष्ट बहुमत नहीं बन पाया था।
कर्जदाताओं का विरोध और सुभाष चंद्रा का पक्ष
जहां 10 बैंकों ने इस सैटलमेंट का समर्थन किया था, वहीं HDFC बैंक, LICHFL और केनरा बैंक जैसे कर्जदाताओं ने इसका कड़ा विरोध किया। विरोध करने वाले बैंकों ने चंद्रा की घटती नेटवर्थ (2017 में 45,900 करोड़ रुपये से घटकर 2024 में 31.79 करोड़ रुपये) की जांच की मांग की है। दूसरी ओर, सुभाष चंद्रा का तर्क है कि 22,006 करोड़ रुपये का कर्ज एस्सेल समूह की कंपनियों का है, जबकि उनकी व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े दावे केवल 3,990 करोड़ रुपये के हैं।
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