इलाहाबाद हाईकोर्ट से यूपी के शिक्षामित्रों को झटका, स्पेशल TET 2026 में शामिल करने की याचिका खारिज

Prayagraj News: उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने स्पेशल टीईटी 2026 में शिक्षामित्रों को बैठने की अनुमति देने संबंधी याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। 24 सितंबर को दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सार्वजनिक किया गया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस मंजू रानी चौहान की एकल पीठ (Single Bench) ने मामले पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता सिर्फ इस तर्क पर विशेष परीक्षा का हिस्सा बनने का दावा नहीं कर सकते कि वे सामान्य TET परीक्षा में बैठने की योग्यता रखते हैं। अदालत ने कहा कि कार्यरत नियमित शिक्षकों और शिक्षामित्रों की कानूनी स्थिति में स्पष्ट अंतर है। संविधान राज्य सरकार को किसी वैध कानूनी उद्देश्य पर आधारित इस तरह के अंतर को खत्म करने के लिए विवश नहीं करता है।

वसीम अहमद सहित 220 शिक्षामित्रों ने दायर की थी याचिका

उल्लेखनीय है कि वसीम अहमद और 220 अन्य शिक्षामित्रों ने याचिका दायर कर राज्य सरकार के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें स्पेशल TET से बाहर रखा गया था। शिक्षामित्रों की मांग थी कि उन्हें भी इस विशेष पात्रता परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाए ताकि वे नियमित शिक्षक भर्ती के लिए पात्र बन सकें या अपनी सेवाएं सुरक्षित कर सकें।

क्या है स्पेशल TET और राज्य सरकार का रुख

सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के तहत उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। आदेश के मुताबिक, अगले एक वर्ष के भीतर सभी कार्यरत अध्यापकों को यह परीक्षा पास करनी होगी, अन्यथा उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है। इस स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले से कार्यरत नियमित सरकारी शिक्षकों को राहत देने के लिए पृथक रूप से स्पेशल TET आयोजित करने का निर्णय लिया था। सरकार की नीति के अनुसार, इस विशेष परीक्षा में केवल वही शिक्षक भाग ले सकते हैं जो पहले से सरकारी सेवा में नियमित रूप से पदस्थ हैं और विद्यालयों में अध्यापन कार्य कर रहे हैं।

शिक्षामित्रों की चिंताएं और भविष्य की राह

यूपी के शिक्षामित्र लंबे समय से अपनी नौकरियों को नियमित (पक्का) करने और समान कार्य-समान वेतन की मांग को लेकर संघर्षरत हैं। चूंकि बड़ी संख्या में शिक्षामित्रों ने अभी तक सामान्य TET उत्तीर्ण नहीं किया है, इसलिए वे इस विशेष अवसर में शामिल होना चाहते थे। हाईकोर्ट के इस कड़े रुख और याचिका खारिज होने के बाद शिक्षामित्रों के सामने अब सामान्य TET के माध्यम से ही योग्यता सिद्ध करने का विकल्प बचा है।

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