यूपी में 3.5 लाख शिक्षकों की होगी जांच, नियुक्ति पत्र से डिग्री तक खंगालेगा शिक्षा विभाग
UP Teachers Verification: उत्तर प्रदेश में फर्जी और गलत तरीके से नौकरी पाने वाले शिक्षकों की पहचान के लिए बड़ी जांच शुरू की गई है। बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े परिषदीय और सहायता प्राप्त (एडेड) प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों के करीब साढ़े तीन लाख शिक्षकों की योग्यता और नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच होगी। इसमें नियुक्ति पत्र से लेकर हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक और शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़ी डिग्रियां तक शामिल हैं।
यह जांच हाईकोर्ट के आदेश पर कराई जा रही है। जांच में फर्जी या नियमों के खिलाफ नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों की रिपोर्ट विशेष कार्य बल (एसटीएफ) को भेजी जाएगी। शिक्षकों को यह शपथ पत्र भी देना होगा कि उनका कोई निकट संबंधी शिक्षा विभाग में बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) या उससे ऊंचे पद पर कार्यरत है या नहीं।
नियुक्ति पत्र और सभी शैक्षिक प्रमाणपत्रों की होगी जांच
बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने सभी जिलों के मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों (एडी) और बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को शिक्षकों की योग्यता की जांच करने के निर्देश दिए हैं। शिक्षकों को एक सप्ताह के भीतर अपने नियुक्ति पत्र और सभी शैक्षिक दस्तावेज बीएसए कार्यालय में जमा करने होंगे।
जांच के दायरे में हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक, बीएड, बीटीसी, डीएलएड, बीएलएड, शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी), केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) के प्रमाणपत्र शामिल होंगे। इसके अलावा शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए जरूरी अन्य योग्यताओं से जुड़े दस्तावेज भी जांचे जाएंगे।
रिश्तेदारों की नौकरी को लेकर भी देना होगा शपथ पत्र
दस्तावेजों के साथ सभी शिक्षकों से शपथ पत्र भी लिया जाएगा। इसमें उन्हें अपने उन निकट संबंधियों का ब्योरा देना होगा, जो शिक्षा विभाग में बीएसए या उससे ऊंचे पदों पर कार्यरत हैं या सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अगर किसी शिक्षक का कोई निकट संबंधी इस पद पर नहीं है, तो उसे भी शपथ पत्र देकर इसकी जानकारी देनी होगी।
इस सूची में पति, पत्नी, पिता, पुत्र, पुत्रवधू, पुत्री, दामाद, सास, साला, बहनोई, साली, ननद और ससुर के अलावा चचेरे, ममेरे, फुफेरे और मौसेरे भाई-बहन भी शामिल हैं। यानी शिक्षकों को यह स्पष्ट करना होगा कि उनका कोई सगा-संबंधी शिक्षा विभाग में अधिकारी के पद पर है या नहीं।
जांच की जिम्मेदारी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों, प्रभारी प्रधानाध्यापकों और खंड शिक्षा अधिकारियों को भी दी गई है। प्रधानाध्यापक अपने स्कूल के शिक्षकों के दस्तावेज उपलब्ध कराएंगे। इसके बाद बीएसए अपने-अपने जिलों की जांच रिपोर्ट तैयार कर एसटीएफ को भेजेंगे।
एसटीएफ के 18 रेंज कार्यालय और सात कमिश्नरेट को भेजी जाएगी रिपोर्ट
निर्देशों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में एसटीएफ के 18 रेंज कार्यालय और सात कमिश्नरेट हैं। सभी जिलों के बीएसए को अपनी जांच रिपोर्ट संबंधित एसटीएफ कार्यालयों तक पहुंचानी होगी। जांच में फर्जी या नियमों के खिलाफ नौकरी पाने वाले शिक्षकों को चिह्नित किया जाएगा। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई और धर-पकड़ की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
यह जांच हाईकोर्ट में कुसुमलता बनाम राज्य सरकार व अन्य की रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए गए निर्देशों के बाद शुरू हुई है।
पहले भी सामने आ चुके हैं फर्जी डिग्री से नौकरी पाने के मामले
उत्तर प्रदेश के परिषदीय और एडेड स्कूलों में पहले भी बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शिक्षक बनने के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे सैकड़ों शिक्षकों को नौकरी से हटाया गया और उनके खिलाफ मुकदमे भी दर्ज कराए गए।
इन मामलों में आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय समेत दूसरे संस्थानों से बीएड की फर्जी डिग्री बनवाकर शिक्षक की नौकरी पाने के मामले भी शामिल रहे हैं। अब नई जांच के जरिए विभाग ऐसे सभी शिक्षकों की नियुक्ति और शैक्षिक योग्यता की पड़ताल करेगा।

