आईआईटी मद्रास के निदेशक पर प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर घमासान, बीजेपी और शिक्षाविदों ने बताया शर्मनाक
Sandesh Wahak Digital Desk: लोकसभा में पेपर लीक रोकने और शिक्षा सुधार बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा आईआईटी (IIT) मद्रास के डायरेक्टर प्रो. वी. कामाकोटी पर की गई टिप्पणी ने देश की राजनीति और शिक्षा गलियारों में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। सदन में चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने प्रो. कामाकोटी को गोमूत्र विशेषज्ञ कहकर संबोधित किया, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और देश के प्रमुख शिक्षाविदों ने उनके इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
पारिवारिक राजनीति से आई प्रियंका को भारत की जड़ों का ज्ञान नहीं: बंदारू विजया लक्ष्मी
तेलंगाना बीजेपी सचिव बंदारू विजया लक्ष्मी ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में प्रियंका गांधी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, देश के इतने जाने-माने वैज्ञानिक प्रो. कामाकोटी पर प्रियंका गांधी का बयान बेहद शर्मनाक है। यह देखना हास्यास्पद है कि कौन किस पर टिप्पणी कर रहा है। प्रियंका परिवार-आधारित राजनीति से आती हैं और मुझे पूरा यकीन है कि उन्हें भारत की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक जड़ों की कोई समझ नहीं है।
टास्क फोर्स सदस्य का अपमान निंदनीय: संजय निरुपम
मुंबई में शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने भी कांग्रेस सांसद के बयान की सख्त शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा क्षेत्र में संरचनात्मक बदलावों के लिए जिस छह सदस्यीय टास्क फोर्स का गठन किया था, उसमें प्रो. कामाकोटी को भी शामिल किया गया था। निरुपम ने कहा कि एक सम्मानित वैज्ञानिक और शिक्षाविद को गोमूत्र विशेषज्ञ बताकर खारिज करना प्रियंका वाड्रा की नकारात्मक मानसिकता को दर्शाता है।
150 से अधिक रिसर्च पेपर और पद्मश्री से सम्मानित हैं प्रो. कामाकोटी
शिक्षा जगत से भी इस टिप्पणी के विरोध में मजबूत आवाजें उठी हैं। जूनागढ़ एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के कुलपति वीपी चोवटिया ने प्रो. कामाकोटी के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि वे एक बेहद उच्च शिक्षित और ख्यातिलब्ध वैज्ञानिक हैं। उन्होंने 150 से अधिक अंतरराष्ट्रीय रिसर्च पेपर पब्लिश किए हैं, दर्जनों बिजनेस रिफॉर्म्स से जुड़े रहे हैं और केंद्र सरकार ने उनके योगदान के लिए उन्हें ‘पद्मश्री’ से नवाजा है। ऐसे में उन पर टिप्पणी करना अनुचित है।
तर्कसंगत और वैज्ञानिक सोच पर उठे सवाल
भुवनेश्वर स्थित उत्कल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. चंडी प्रसाद नंदा ने इस पूरे विवाद पर अकादमिक दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि किसी विद्वान के लिए गोमूत्र विशेषज्ञ जैसे शब्दों का प्रयोग करना न तो वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुकूल है और न ही तर्कसंगत है। उन्होंने कहा कि एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद के योगदान को इस तरह के विवादित संदर्भ में देखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

