Swami Avimukteshwarananda Case में सुनवाई टली, जानें वजह

Sandesh Wahak Digital Desk: प्रयागराज में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से पॉक्सो कोर्ट में दाखिल की गई अर्जी (Swami Avimukteshwarananda Case) पर सुनवाई टल गई है। अलविदा नमाज के कारण अदालत न बैठने से यह सुनवाई स्थगित करनी पड़ी। इस मामले में दोपहर 2 बजे स्पेशल जज पॉक्सो विनोद कुमार चौरसिया की अदालत में सुनवाई होनी थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 अप्रैल को होगी। अगली तारीख पर वादी स्वामी मुकुंदानंद गिरी के बयान अदालत में दर्ज किए जाएंगे।

केस खारिज करने की मांग

POCSO Court Prayagraj में दाखिल अर्जी में आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से लगाए गए आरोपों को झूठा बताया गया है और उन्हें रद्द करने की मांग की गई है। स्वामी मुकुंदानंद गिरी ने यह भी कहा है कि ट्रेन में हमले से जुड़ा मामला भी झूठा है। इसके साथ ही डॉ स्वाति अघोरी के फेसबुक अकाउंट को भी फर्जी बताया गया है। उन्होंने कहा कि उनके गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके विदेश भागने के लगाए गए आरोप भी पूरी तरह निराधार हैं।

विदेश जाने के आरोपों को भी बताया गलत

स्वामी मुकुंदानंद गिरी ने कहा कि दंडी संन्यासी परंपरा में विदेश जाना प्रतिबंधित है। उन्होंने दावा किया कि न तो उनके गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का पासपोर्ट बना है और न ही उनका पासपोर्ट या वीजा है। इसलिए विदेश भागने के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है।

लीगल टीम अदालत में देगी जवाब

स्वामी मुकुंदानंद गिरी ने बताया कि इस पूरे मामले (Swami Avimukteshwarananda Case) को उनकी लीगल टीम देख रही है और अदालत में कानूनी तरीके से ही जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में गौ हत्या बंद कराने के लिए अभियान जारी रहेगा। उनके गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने हाल ही में लखनऊ से गौ हत्या बंद करने के अभियान की शुरुआत भी की है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल आशुतोष ब्रह्मचारी ने दो नाबालिग बटुकों के साथ यौन शोषण का आरोप स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर लगाया था। इसके बाद 21 फरवरी को पॉक्सो कोर्ट ने झूंसी थाना पुलिस को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसी आदेश के खिलाफ पॉक्सो कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है। सुनवाई के दौरान स्वामी मुकुंदानंद गिरी के साथ सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ पी एन मिश्रा, अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी और लीगल टीम के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।

 

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