सिद्धार्थनगर जिला जेल को एक साथ मिले 3 अंतरराष्ट्रीय ISO प्रमाण पत्र

Siddharthnagar News: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिला कारागार ने प्रशासनिक व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण, सुरक्षा तथा बंदियों के स्वास्थ्य मानकों के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जेल प्रशासन ने उत्कृष्ट कार्यप्रणाली का प्रदर्शन करते हुए एक साथ तीन अंतरराष्ट्रीय आईएसओ (ISO) प्रमाण पत्र प्राप्त कर इतिहास रच दिया है। इस बड़ी सफलता से न केवल जनपद बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के कारागार विभाग का मान देश भर में बढ़ा है।

डीएम ने सौंपे प्रमाण पत्र

कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक विशेष और गरिमामयी समारोह के दौरान जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने जिला जेल के अधीक्षक सचिन वर्मा को तीनों अंतरराष्ट्रीय प्रमाण पत्र सौंपे। इन सर्टिफिकेट्स का विवरण इस प्रकार है।

ISO 9001:2015 (गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली): यह प्रमाण पत्र जेल की उत्कृष्ट प्रशासनिक व्यवस्था, पारदर्शिता, अनुशासन और कार्य संस्कृति की उच्च गुणवत्ता को दर्शाता है।

ISO 14001:2015 (पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली): यह इस बात को प्रमाणित करता है कि कारागार परिसर पूरी तरह इको-फ्रेंडली (पर्यावरण अनुकूल) है और यहाँ कचरा व जल प्रबंधन के बेहतरीन इंतजाम हैं।

ISO 45001:2018 (स्वास्थ्य एवं सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली): यह सर्टिफिकेट जेल के भीतर बंदियों और स्टाफ की सुरक्षा तथा उनके उत्तम स्वास्थ्य व चिकित्सा प्रबंधन को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रमाणित करता है।

सिद्धार्थनगर जिला जेल को एक साथ मिले 3 अंतरराष्ट्रीय ISO प्रमाण पत्र

जेल अधीक्षक सचिन वर्मा के नेतृत्व में बदला कारागार का स्वरूप

यह ऐतिहासिक उपलब्धि जिला जेल की टीम द्वारा पिछले लंबे समय से किए जा रहे सुधारात्मक प्रयासों का परिणाम है। जेल अधीक्षक सचिन वर्मा के कुशल नेतृत्व में कारागार के भीतर कई सकारात्मक बदलाव किए गए हैं।

हरित और स्वच्छ परिसर: कारागार के भीतर स्वच्छता, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, बड़े पैमाने पर पौधरोपण, जल संरक्षण (वॉटर हार्वेस्टिंग) तथा हरित वातावरण (ग्रीन बेल्ट) को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाए गए।

बंदियों का मानसिक व शारीरिक विकास: जेल में निरुद्ध बंदियों को अवसाद से दूर रखने और स्वस्थ बनाने के लिए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, योग, ध्यान (मेडिटेशन), खेलकूद प्रतियोगिताओं और मानसिक परामर्श (काउंसलिंग) की व्यवस्था सुदृढ़ की गई है।

पुनर्वास और कौशल विकास: बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विभिन्न व्यावसायिक व तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम (स्किल डेवलपमेंट) संचालित किए जा रहे हैं, ताकि जेल से रिहा होने के बाद वे सम्मानपूर्वक आजीविका कमा सकें।

इस ऐतिहासिक मौके पर जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूरे सिद्धार्थनगर जनपद के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। यह जेल प्रशासन के कड़े अनुशासन और पारदर्शी कार्यशैली को बयां करता है। वहीं, जेल अधीक्षक सचिन वर्मा ने इस सफलता का पूरा श्रेय कारागार के समस्त अधिकारियों, प्रहरियों और कर्मचारियों की सामूहिक मेहनत, लगन और सकारात्मक सोच को समर्पित किया।

रिपोर्ट- जाकिर खान

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