यूक्रेन का रूस के सैन्य ठिकानों और ऑयल डिपो पर बड़ा हमला, रूसी बमबारी के बाद की जवाबी कार्रवाई
Sandesh Wahak Digital Desk: यूक्रेन और रूस के बीच छिड़ी जंग अब और अधिक आक्रामक मोड़ ले चुकी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि उनकी सेना ने बुधवार को रूस के कई प्रमुख सैन्य ठिकानों, रसद अड्डों और तेल भंडारण डिपो पर लंबी दूरी की मिसाइलों से भीषण हमले किए हैं। जेलेंस्की के मुताबिक, इन जवाबी हमलों का मुख्य मकसद मॉस्को पर कूटनीतिक दबाव बनाना है ताकि उसे शांति वार्ता के लिए मजबूर किया जा सके।
रूस के सैन्य हब और जहाजों पर निशाना
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि यूक्रेन की रक्षा सेनाओं ने रूस के क्रास्नोडार और स्टावरोपोल क्षेत्रों में स्थित रणनीतिक ठिकानों को सफलतापूर्वक ध्वस्त कर दिया है। ये वे स्थान थे जहां से रूसी सेना को ड्रोन स्पेयर पार्ट्स, नेविगेशन उपकरण और सैन्य सामग्री की सप्लाई की जाती थी। इसके अलावा एक प्रमुख ऑयल डिपो को भी निशाना बनाया गया है।
जेलेंस्की ने यह भी बताया कि आजोव और काला सागर में रूसी ‘शैडो फ्लीट’ के एक टैंकर और चार मालवाहक जहाजों को भी यूक्रेन ने अपना शिकार बनाया है। उन्होंने यूक्रेनी सेना के जवानों की सराहना करते हुए कहा कि वे पूरी तरह से जायज तरीके से इस युद्ध को रूस की सरजमीं तक वापस ले जा रहे हैं, ताकि पुतिन सरकार को शांति की राह चुननी पड़े।
यूक्रेन का यह पलटवार मंगलवार को रूस द्वारा किए गए भीषण हवाई हमलों के बाद आया है। रूस ने जापोरिज्जिया, खेरसोन और ओडेसा में हमला किया था, जिसमें एक सात मंजिला आवासीय इमारत को निशाना बनाया गया। पहली से सातवीं मंजिल तक आग लगने से कई आम नागरिकों की मौत हो गई और कई घायल हो गए थे। जेलेंस्की ने इस हमले को युद्ध अपराध बताते हुए कड़ा ऐतराज जताया था।
वैश्विक सहयोगियों से मदद की गुहार
तनावपूर्ण माहौल के बीच जेलेंस्की ने अपने पश्चिमी और यूरोपीय साझेदार देशों से सैन्य मदद जारी रखने की अपील की है। उन्होंने यूरोपीय संघ से 21वें प्रतिबंध पैकेज को जल्द मंजूरी देने की मांग की। साथ ही उन्होंने हथियार निर्माता कंपनियों से रक्षा उपकरणों और एयर डिफेंस सिस्टम की त्वरित आपूर्ति करने का आग्रह किया ताकि बेकसूर लोगों की जान बचाई जा सके।
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